
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर: धार भोजशाला मामले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की जिस रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट सीलबंद मान रहा था, वह दो साल से पक्षकारों के पास है। यह खुलासा सोमवार को उस वक्त हुआ जब हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए सर्वेक्षण रिपोर्ट के बारे में जानकारी मांगी।
महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कोर्ट को बताया कि सर्वेक्षण रिपोर्ट पूर्व में ही पक्षकारों को सौंपी जा चुकी है, लेकिन यह जानकारी न शासन ने सुप्रीम कोर्ट को दी न पक्षकारों ने, हालांकि इसके पीछे किसी की कोई दुर्भावना नहीं थी।
इस पर कोर्ट ने कहा कि रिपोर्ट पक्षकारों के पास है, वे चाहें तो इसे लेकर अपने सुझाव, आपत्ति 16 मार्च से पहले लिखित में कोर्ट में दे सकते हैं। आपत्ति, सुझाव पर सुनवाई के बाद कोर्ट इस मामले को अंतिम सुनवाई के लिए नियत कर देगी।
बता दें कि भोजशाला मामले को लेकर हाई कोर्ट में चार याचिकाएं और एक अपील चल रही है। सोमवार को इन सभी की सुनवाई एक साथ हुई। हाई कोर्ट की युगलपीठ ने 11 मार्च 2024 को एएसआई को आदेश दिया था कि वह ज्ञानवापी की तरह भोजशाला का भी विज्ञानी सर्वे कर रिपोर्ट प्रस्तुत करे।
यह सर्वे 98 दिन चला जिसके बाद एएसआई ने 2189 पेज की सर्वे रिपोर्ट तैयार की थी। 4 जुलाई 2024 को हाई कोर्ट के आदेश पर इस रिपोर्ट की प्रतिलिपि सभी पक्षकारों को उपलब्ध करवाई गई थी। इस बीच यह मामला सुप्रीम कोर्ट चला गया जिसके बाद कोर्ट ने रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में रखने के आदेश दिए थे।
एएसआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सर्वे में पाए गए स्तंभों और स्तंभों की कला और वास्तुकला से यह कहा जा सकता है ये स्तंभ पहले मंदिर का हिस्सा थे, बाद में मस्जिद के स्तंभ बनाते समय उनका पुन: उपयोग किया गया था।
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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई द्वारा किए गए सर्वे में भोजशाला के मंदिर होने के कई प्रमाण मिले हैं। रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया है कि वर्तमान संरचना यानी कमाल मौलाना दरगाह के निर्माण में पहले से मौजूद मंदिर के हिस्सों का उपयोग किया गया था। 98 दिन चले विज्ञानी सर्वे और इस सर्वे में मिले पुरातत्व महत्व के अवशेषों के आधार पर कहा जा सकता है कि मंदिर के उक्त हिस्से परमारकालीन थे।
रिपोर्ट में सर्वे के दौरान एकत्रित किए 1700 से ज्यादा प्रमाण और खोदाई में मिले अवशेषों का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट का निष्कर्ष 151 पेज में संकलित किया गया है। इसमें कहा है कि भोजशाला के सर्वे में मिली कलाकृतियां बेसाल्ट, संगमरमर, नरम पत्थर, बलुआ पत्थर और चूना पत्थर से तैयार की गई थीं जो कि इसे कलात्मक विरासत की झलक प्रदान करती थीं।
जो प्रमाण सर्वे के दौरान सामने आए हैं वे स्पष्ट इंगित करते हैं कि भोजशाला एक मंदिर ही है। एक शिलालेख भी मिला है जिसमें कहा है कि भोजशाला पर आक्रमण हुआ था और तोड़फोड़ भी की गई थी। यहां कि मूर्तियों को तोड़कर इस परिसर को मस्जिद में बदला गया था।