
कपिल नीले, नईदुनिया, इंदौर : कैंपस की चारदीवारी के भीतर विद्यार्थी का व्यवहार अब वहीं तक सीमित नहीं रहेगा। नौकरी की कतार में उसकी कक्षा की उपलब्धियों के साथ उसका आचरण भी देखा जाएगा।
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (डीएवीवी) में शुरू हुए नए सत्र के कैंपस प्लेसमेंट में कंपनियों ने विद्यार्थियों को परखने का दायरा बढ़ा दिया है। अब अंक और तकनीकी योग्यता के साथ साफ्ट स्किल, अनुशासन, सांस्कृतिक गतिविधियों में भागीदारी और यहां तक कि पुलिस प्रकरण की जानकारी भी कंपनियां मांग रही हैं। यानी नौकरी के लिए अब केवल यह पर्याप्त नहीं कि विद्यार्थी कितना अच्छा पढ़ता है, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण होगा कि उसका व्यवहार और पृष्ठभूमि कैसी है।
सेंट्रल प्लेसमेंट सेल प्रभारी डॉ. गोविंद महेश्वरी के अनुसार, प्लेसमेंट के दौरान कई बार कंपनियां विद्यार्थियों की व्यक्तिगत जानकारी मौखिक रूप से भी लेती हैं। कुछ कंपनियां अपने स्तर पर विद्यार्थियों का बैकग्राउंड वेरिफिकेशन भी करवाती हैं।
कंपनियों की बढ़ी सख्ती के पीछे पिछले साल आइईटी में सामने आई रैगिंग की घटना को भी एक कारण माना जा रहा है। घटना में तृतीय और अंतिम वर्ष के कुछ विद्यार्थियों के नाम सामने आए थे। अंतिम वर्ष के कुछ विद्यार्थियों को जाब आफर मिलने के बाद संस्थान ने कंपनियों को इसकी जानकारी दी। इसके बाद कुछ विद्यार्थियों को अब तक ज्वाइनिंग नहीं मिली है। इससे कंपनियां विद्यार्थियों की पृष्ठभूमि को लेकर अपने स्तर पर भी सतर्क हो गई हैं।
प्रबंधन अध्ययनशाला में प्लेसमेंट से पहले वाट्सऐप ग्रुप के एडमिन को लेकर विद्यार्थियों के दो पक्षों में विवाद हुआ। मामला प्रबंधन तक पहुंचने पर दोनों पक्षों को बुलाकर समझाइश दी गई और कंपनियों की नई शर्तों से अवगत कराया गया। विद्यार्थियों के भविष्य को देखते हुए विभाग ने फिलहाल जांच समिति गठित नहीं की है। विश्वविद्यालय का कहना है कि कैंपस में छोटी-सी अनुशासनहीनता भी करियर पर असर डाल सकती है। इसलिए पढ़ाई के साथ अच्छा व्यवहार और अनुशासित आचरण जरूरी है।
बेंगलुरु स्थित एक मल्टीनेशनल कंपनी के एचआर मैनेजर के मुताबिक कार्यस्थल पर महिला और पुरुष दोनों साथ काम करते हैं। संस्थान में स्वस्थ वातावरण बनाए रखने के लिए नियम पहले से अधिक सख्त हुए हैं। ऐसे में नियुक्ति से पहले उम्मीदवार से जुड़ी छोटी से छोटी जानकारी भी कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण हो गई है।
सेंट्रल प्लेसमेंट सेल के सदस्य अवनीश व्यास और डा. निशिकांत वाइकर के अनुसार अब तक करीब आधा दर्जन कंपनियां प्लेसमेंट से पहले विद्यार्थियों की विस्तृत जानकारी मांग चुकी हैं। इसमें अनुशासन समिति की कार्रवाई और पुलिस प्रकरण जैसी जानकारी शामिल है। उनका कहना है कि ऐसे मामलों वाले विद्यार्थियों को कंपनियां कैंपस प्लेसमेंट से दूर रखती हैं।