इंदौर के एमवाय अस्पताल में शुरू हुआ फ्रोजन सेक्शन, आधे घंटे में आ रही ट्यूमर की जांच रिपोर्ट
इंदौर के एमवाय अस्पताल में फ्रोजन सेक्शन लैब शुरू हो गई है। अब ट्यूमर में कैंसर की पुष्टि 30 मिनट में हो रही है, पहले तीन दिन लगते थे। ...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 18 Apr 2026 09:41:00 AM (IST)Updated Date: Sat, 18 Apr 2026 09:59:50 AM (IST)
अस्पताल में फ्रोजन सेक्शन लैब में जांच करते हुए विशेषज्ञ।HighLights
- माइनस 10 डिग्री पर टिशू जमाकर 20 से 30 मिनट में स्लाइड जांच होती है
- पहले ऑपरेशन में तीन लिंफ नोड की जांच 25 मिनट में कर कैंसर की पुष्टि की
- बायोप्सी रिपोर्ट के इंतजार में सर्जरी टालने या अधूरी करने की जरूरत खत्म हुई
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। एमवाय अस्पताल के सर्जरी विभाग में मरीजों के लिए फ्रोजन सेक्शन लैब शुरू हो गई है, इसके माध्यम से अब 30 मिनट में ट्यूमर में कैंसर की मौजूदगी की पुष्टि हो रही है। अब तक मरीजों को कैंसर की पुष्टि के लिए तीन दिन का इंतजार करना पड़ रहा था। इसके माध्यम से सर्जन ऑपरेशन टेबल पर ही पता लगा सकेंगे कि टिशू कैंसर वाला है या नहीं।
मरीज को दोबारा ऑपरेशन की जरूरत नहीं पड़ती है और ट्यूमर एक ही बार में निकाला जा सकता है। शुक्रवार को गाल ब्लैडर ट्यूमर के दो मरीजों के ऑपरेशन किए गए। पहले आपरेशन में गाल ब्लैडर कैंसर सीटी स्कैन द्वारा बता दिया गया था।
ऑपरेशन में तीन अलग-अलग सेगमेंट के तीन लिंफ नोड को भेजा गया। जिसमें 25 मिनट में पैथोलाजी के डॉक्टर ने फ्रोजन सेक्शन द्वारा कैंसर की पुष्टि की। जिसके बाद आंकोसर्जन द्वारा ऑपरेशन किया गया। इसी प्रकार अन्य आपरेशन में गाल ब्लैडर में ट्यूमर और स्वेलिंग थी। फ्रोजन के माध्यम से बायोप्सी हुई। इसके बाद मरीज का आपरेशन किया गया।
इन मरीजों को मिलेगा इससे लाभ
इससे उन मरीजों को फायदा होगा, जिनके शरीर में गांठ (ट्यूमर) बनी होती है और डॉक्टर तय नहीं कर पाते कि इसमें कैंसर है या नहीं। अभी तक इसके लिए ट्यूमर का बायोप्सी नमूना लैब में भेजा जाता है, जिसकी रिपोर्ट आने में दो से तीन दिन का समय लगता है। जब तक रिपोर्ट नहीं आती, तब तक सर्जरी टाल दी जाती है या अधूरी की जाती है। लेकिन अब फ्रोजन सेक्शन तकनीक से ऑपरेशन के समय ही जांच हो रही है।
यह होता है फ्रोजन सेक्शन
डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया के मुताबिक फ्रोजन सेक्शन आधुनिक तकनीक है, जिसमें ट्यूमर के बायोप्सी को माइनस 10 डिग्री से नीचे के तापमान पर जमाया जाता है। इसके बाद उस ऊतक का पतला स्लाइड तैयार कर माइक्रोस्कोप से जांच की जाती है।
इस पूरी प्रक्रिया में लगभग 20 से 30 मिनट लगते हैं। इससे पता चल जाता है कि गांठ में कैंसर की कोशिकाएं हैं या नहीं। निजी अस्पताल में जांच का खर्च 10 से 15 हजार रुपये तक आता है, लेकिन यहां निश्शुल्क सुविधा मिल रही है।
इन अंगों के ट्यूमर की होगी जांच
- पेट (आंतों, लिवर, पैंक्रियाज आदि)
- स्तन
- गर्दन
- पैर और हाथों के साफ्ट टिशू के ट्यूमर
- महिलाओं की गर्भाशय या अंडाशय के ट्यूमर
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