
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। मध्य प्रदेश में करीब दो दशक बाद यात्री बस परिवहन को नए स्वरूप में खड़ा किया जा रहा है। इस पूरी योजना को तीन स्तंभों संचालन, निगरानी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर तैयार किया गया है। यानी सरकार बस संचालन की पूरी व्यवस्था को डेटा, तकनीक और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के आधार पर दोबारा व्यवस्थित करने जा रही है।
दरअसल वर्ष 2005 के बाद सरकारी बस परिवहन व्यवस्था की व्यवहारिकता कमजोर होने से निजी आपरेटरों पर निर्भरता बढ़ी और पिछले करीब 20 वर्षों से प्रदेश में बस संचालन मुख्य रूप से निजी क्षेत्र के भरोसे है। अब सरकार मुख्यमंत्री सुगम परिवहन बस सेवा का शुभारंभ 25 सितंबर से करने जा रही है।
मुख्यमंत्री इंदौर में हुई यात्री समिट में इसकी घोषणा कर चुके हैं। परिवहन एमडी मनीष सिंह का कहना है कि इस व्यवस्था को पीपीपी मॉडल आधारित बनाया गया है। इसमें इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जाएगा, जिसमें यात्री सुरक्षा, डेटा आधारित संचालन और ग्रीन मोबिलिटी योजना के केंद्र में शामिल है।
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा को एक अप्रैल 2025 को मंत्रिपरिषद की बैठक में मंजूरी दी गई थी। इसमें बाद 3 जुलाई 2025 को मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड का गठन किया गया। संस्थागत रूप देने के साथ ही प्रदेश के 55 जिलों में 1036 रूट चिह्नित किए गए।
जिसमें 150 सिटी बस मार्ग, 450 इंटरसिटी और 436 इंटरस्टेट मार्ग चिन्हित किए गए। इंदौर से अन्य शहरों के लिए 23 रूट चिन्हित हैं। निजी बस आपरेटरों से अनुबंध कर बसों का संचालन होगा और निगरानी शासन स्तर से होगी। बस का प्रबंध करना ऑपरेटर की जिम्मेदारी होगी।
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