
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर: चिकित्सक की सलाह के अनुसार एंटीबायोटिक दवा न लेने से मरीजों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। शहर में सैकड़ों ऐसे मरीज चिकित्सकों के पास पहुंचते हैं, जिनकी बीमारी पर एंटीबायोटिक्स का असर न होने से बीमारी खत्म नहीं होती है।
ऐसे में चिकित्सक उनके एंटीबायोटिक्स बदलते हैं या उसके डोज बढ़ाते हैं। विदेश में जहां एमबीबीएस चिकित्सक के लिए सीमित मात्रा में एंटीबायोटिक दवाएं देने का प्रविधान है, वहीं इंदौर सहित भारत के अधिकांश शहरों व कस्बों में स्थिति यह है कि गली-मोहल्लों के झोलाछाप एवं बीएएमएस व बीएचएमएस भी मरीजों को एलोपैथी दवाओं के साथ एंटीबायोटिक दवा दे देते हैं।
ये चिकित्सक मरीज को एंटीबायोटिक का तय डोज नहीं बताते हैं। यही वजह है कि निर्धारित मात्रा में एंटीबायोटिक दवा न लेने पर मरीज के शरीर में दवा के लिए प्रतिरोध क्षमता विकसित हो जाती है और एंटीबायोटिक दवा लेने पर भी मरीज की बीमारी ठीक नहीं होती है।
केस एक : 35 साल की महिला को 10 दिन से बुखार था। उन्होंने घर के पास फिजिशियन से उपचार लिया। जांच में उन्हें टाइफाइड होना पाया गया। एंटीबायोटिक दवा भी ली, लेकिन बीमारी खत्म नहीं हुई। ऐसे में वो अन्य चिकित्सक के पास पहुंची तो वहां पता चला कि एंटीबायोटिक दवा उनकी बीमारी पर काम नहीं कर रही है। ऐसे में उन्हें अस्पताल में भर्ती करके इंजेक्शन के जरिए एंटीबायोटिक दवा देनी पड़ी।
केस दो: 42 वर्षीय महिला को यूरिन का इंफेक्शन था। उन्होंने कई अलग-अलग तरह के एंटीबायोटिक लिए, लेकिन बीमारी ठीक नहीं हुई। यूरिन का जब कल्चर व सेंसिटिविटी जांच करवाई तो पता चला कि उनका संक्रमण सामान्य एंटीबायोटिक दवा के लिए लायक नहीं था। उन्हें जब इंजेक्शन के माध्यम से एंटीबायोटिक दवा दी गई तब वह पूरी तरह ठीक हो पाईं।
मरीज को चिकित्सक के परामर्श के अनुसार एंटीबायोटिक व अन्य दवाओं का पूरा डोज लेना चाहिए। बीच में दवा छोड़ने पर मरीजों के शरीर में बैक्टीरिया की एंटीबायोटिक दवा के लिए प्रतिरोध क्षमता विकसित कर लेते हैं। ऐसे में मरीज की बीमारी को सही होने में ज्यादा समय भी लगता है। कई बार मरीज को इंजेक्शन के माध्यम से एंटीबायोटिक देना पड़ता है।
-डॉ. प्रवीण दाणी, एमडी मेडिसिन
यदि मरीज चिकित्सक के परामर्श के अनुरूप एंटीबायोटिक दवाएं निर्धारित समय पर ले और थोड़े समय के लिए ले तो बैक्टीरिया की थोड़ी ग्रोथ कुछ समय दवा लेने पर कम होती है। दवा का कोर्स पूरा नहीं लेने पर बैक्टीरिया पूरी तरह नष्ट नहीं होते हैं और दवा के लिए प्रतिरोध क्षमता विकसित कर लेते हैं। ऐसे में उस व्यक्ति के दोबारा बीमार होने पर या उस व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को संक्रमण होने पर सामान्य एंटीबायोटिक दवाएं असर नहीं करती हैं।
-डॉ. वीपी पांडे, पूर्व डीन एमजीएम मेडिकल कालेज