
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर: इंदौर-बुधनी के बीच बन रही नई बाडगेज रेल लाइन रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। पहले से ही देरी का सामना कर रही इस महत्वाकांक्षी परियोजना की प्रगति जमीन अधिग्रहण की सुस्त प्रक्रिया के कारण धीमी है। कई गांवों में मुआवजा और सीमांकन संबंधी औपचारिकताएं पूरी नहीं हो पाने से निर्माण कार्य तय गति से धीमा चल रहा है।
रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक अब इस रेल लाइन को पूरा करने का लक्ष्य बढ़ाकर वर्ष 2030 तक कर किया गया है, जिससे क्षेत्रवासियों को सीधी रेल कनेक्टिविटी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ेगा।
इंदौर-बुधनी नई रेल लाइन प्रोजेक्ट में रेलवे ने सबसे चुनौतीपूर्ण और सबसे बड़ी साढ़े आठ किमी की टनल का काम शुरू हो चुका है। आरवीएनएल एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिकबागली तहसील में कमलापुर गांव के पास बन रही इस टनल में पांच प्रतिशत पूरा कर लिया है।
अगले तीन साल में इस टनल का काम पूरा करने का टारगेट है। टनल के साथ ही बाकी हिस्से में भी काम होगा। सिर्फ टनल के प्रोजेक्ट की लागत एक हजार करोड़ रुपये है। यहां पर दो टनल बनेगा। दूसरी एस्केप टनल (आपातकालीन स्थिति के लिए) बनाई जाएगी।
टनल के साथ ही रेलवे ने 30 प्रतिशत अर्थ वर्क का काम पूरा कर लिया है। रेलवे अलग-अलग सेक्शन में काम शुरू कर दिया है। अंडरपास, ब्रिज का काम रेलवे कर रहा है। वर्ष 2030 तक इस प्रोजेक्ट को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
कन्नोद तहसील में 20 किमी जमीन अधिग्रहण नहीं हुआ है। इसके अलावा कई स्थानों पर किसानों का विरोध भी चल रहा है। किसानों का कहना है कि रेल लाइन के लिए उनकी उपजाऊ जमीन जा रही है। इसके अलावा प्रशासन नियमों के हिसाब से मुआवजा नहीं दे रहा है। मुआवजे की राशि काफी कम है। किसानों ने कहा कि उन्हें बाजार कीमत से मुआवजा दिया जाए या जो जमीन जा रही है, उसके बदले दूसरी खेती योग्य जमीन दी जाए।
परियोजना में 80 बड़े पुल और दो टनल (1.24 किमी एवं 8.64 किमी) प्रस्तावित है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस रूट पर कोई लेवल क्रासिंग नहीं होगी, अंडरपास और ओवरब्रिज बनाए जाएंगे। टनल का डिजाइन वन्यजीव क्षेत्र को सुरक्षित रखते हुए तैयार किया गया है। योजना के अनुसार 2027-28 में बुधनी से सलकनपुर, 2028-29 में मांगलिया गांव से खेरी और 2029-30 तक पूरा ट्रैक तैयार करने का लक्ष्य है।
रेलवे के जानकारों के मुताबिक इंदौर-बुधनी नई रेल लाइन यात्री और रेलवे दोनों के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण है। इस लाइन से जबलपुर की दूरी 68 किमी तक कम हो जाएगी। फिलहाल, भोपाल, इटारसी होते हुए ट्रेन जाती है। अभी करीब 554 किमी दूरी है, जो नई लाइन से 486 किमी तक रह जाएगी। करीब एक घंटे तक का समय भी बचेगा। इसके अलावा उत्तर से दक्षिण की ट्रेनों को भी फायदा होगा। मालगाड़ी एवं यात्री ट्रेनों के लिए नया रूट तैयार हो जाएगा।