इंदौर में डॉक्टर सैलरी ले रहे थे सरकारी अस्पताल से और जांच कर रहे प्राइवेट सेंटर में, शिकायत के बाद सोनोग्राफी मशीन सील
इंदौर कलेक्टर के पास शिकायत पहुंचने पर पीसी डायग्नोस्टिक सॉल्यूशन सर्वहारा नगर की सोनोग्राफी मशीन सील की गई। ...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 22 Apr 2026 09:19:16 AM (IST)Updated Date: Wed, 22 Apr 2026 09:28:24 AM (IST)
मशीन सील करने की कार्रवाई करते हुए अधिकारी।HighLights
- पीसीपीएनडीटी नियम के तहत डॉक्टर के बिना अल्ट्रासोनोग्राफी संचालन संभव नहीं, फिर भी चल रहा था सेंटर
- सीएमएचओ डॉ. माधव हासानी: शासकीय रेडियोलॉजिस्ट बिना डीन की अनुमति के निजी केंद्र में काम नहीं कर सकते
- कलेक्टर के पास शिकायत पर होती कार्रवाई, लेकिन कुछ दिन बाद संरक्षण में फिर शुरू हो जाती हैं मशीनें
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर शहर में बिना चिकित्सकों के ही सोनोग्राफी से मरीजों की जांच की जा रही है, लेकिन जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं। इसी के साथ शासकीय अस्पताल में पदस्थ डॉक्टर तनख्वाह से सरकार से ले रहे हैं, लेकिन कार्य निजी सेंटरों में कर रहे हैं। कलेक्टर के पास पहुंची एक शिकायत के बाद एक केंद्र से मशीन सील कर दी गई।
अधिकारियों ने बताया कि पीसी डायग्नोस्टिक सॉल्यूशन सर्वहारा नगर की एक टीम बनाकर निरीक्षण करवाया गया। इसमें पाया गया कि क्लीनिक पर केवल एक चिकित्सक डॉ. रिंकू मीणा एमडी रेडियोलाजिस्ट पंजीकृत थे, लेकिन सक्षम प्राधिकारी द्वारा अवलोकन करने पर पाया गया कि डॉ. मीणा बंधपत्र चिकित्सक हैं। वर्तमान में वह एमवाय चिकित्सालय में कार्यरत हैं, बावजूद यहां काम कर रहे थे। पीसीपीएनडीटी नियमानुसार बगैर चिकित्सक अल्ट्रासोनोग्राफी का संचालन किया जाना संभव नहीं है।
बिना अनुमति के नहीं कर सकते निजी सेंटर में कार्य
सीएमएचओ डॉ. माधव हासानी के मुताबिक शासकीय अस्पतालों में कार्य करने वाले रेडियोलाजिस्ट निजी केंद्रों में बिना डीन की अनुमति के कार्य नहीं कर सकते हैं, लेकिन डॉ. मीणा वर्षों से काम कर रहे थे। निजी केंद्रों पर बगैर डीन की अनुमति के कार्य करने के लिए नोटिस जारी किया गया है।
दिखावे तक की कार्रवाई फिर शुरू हो जाती हैं मशीनें
स्वास्थ्य विभाग के पास सीधे तौर पर इस तरह की कोई शिकायत नहीं आती है, क्योंकि यह कोई कार्रवाई नहीं करते हैं। कलेक्टर के पास बिना चिकित्सकों के संचालित मशीनों की इससे पहले भी शिकायत पहुंची है, जिनमें कार्रवाई हुई है, लेकिन यह कार्रवाई दिखावे तक ही सीमित रहती है। थोड़े दिनों के बाद दोबारा मशीनें इनके संरक्षण में शुरू हो जाती हैं।