
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : वर्ष 2026 की तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत कल यानी 12 सितंबर को लगने वाली है। नगर निगम ने राष्ट्रीय लोक अदालत में 50 करोड़ रुपये राजस्व एकत्रित करने का लक्ष्य रखा है। कहने को भले ही नगर निगम का राजस्व अमला मैदान में उतर गया है, लेकिन यह वास्तविकता से दूर और औपचारिकता ज्यादा नजर आ रहा है।
हर बार की तरह नगर निगम ने इस बार भी मोबाइल नंबरों पर थोक में मैसेज भेजे साथ ही बकायादारों को बकायदा नोटिस भी जारी किए। हालांकि लक्ष्य प्राप्ति के लिए किए ये दोनों प्रयास निगम पर भारी पड़ रहे हैं। जिन संपत्तिधारकों के दो-चार रूपये बकाया हैं उन्हें भी मोबाइल पर मैसेज मिल रहा है।
साथ ही थोकबंद नोटिस जारी करने के चक्कर में उन संपत्ति धारकों को भी नोटिस जारी हो गए जो पूर्व में ही संपत्ति कर का एडवांस में भुगतान कर चुके हैं। इसके चलते संपत्तिधारक परेशान हो रहे हैं। वे निगम के जोनल कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं ताकि बता सकें कि वे तो एडवांस में पैसा जमा करा चुके हैं। कई जगह ऐसे मामले भी सामने आए हैं जहां नोटिस गलत पते पर भेज दिया गया है।
राष्ट्रीय लोक अदालत में नगर निगम ने जलकर और संपत्तिकर अधिभार में छूट का प्रविधान भी किया है। लक्ष्य है कि लोक अदालत का लाभ उठाते हुए ज्यादा से ज्यादा राजस्व एकत्रित कर लिया जाए। करीब एक माह पहले से लोक अदालत की तैयारी शुरू हो भी गई थी, बावजूद इसके सतर्कता की कमी के चलते लोगों के पास गलत नोटिस पहुंच रहे हैं।
नागरिकों की शिकायत है कि पूर्व में एडवांस में कर का भुगतान करने के बावजूद बकाया का नोटिस मिला है। भानगढ़ निवासी पीयूष दीक्षित ने बताया कि उन्होंने एडवांस में निगम के सभी करों का भुगतान कर दिया है, बावजूद इसके उनके पते पर 26 हजार रूपये बकाया बताते हुए नोटिस जारी हुआ। इतना ही नहीं नोटिस में पता तो उनका है, लेकिन नाम किसी ओर का लिखा हुआ है। उनकी मल्टी में करीब 20 लोगों को ऐसे गलत नोटिस जारी हुए हैं। ऐसी ही शिकायत शहर के अलग-अलग क्षेत्रों से भी आ रही है।
अग्रिम भुगतान के बावजूद नोटिस मिलने से घबराए लोग जोनल कार्यालय पहुंच रहे हैं। जोनल कार्यालयों पर पदस्थ कर्मचारियों के मुताबिक पिछले करीब आठ दिन से ऐसे लोगों की संख्या बढ़ गई है।
यह बात सही है कि मोबाइल पर बल्क में सूचना जारी करने में गड़बड़ी हो जाती है। ऐसे लोगों को भी मैसेज हो जाते हैं जिनके कुछ पैसे या एक-दो रुपये बकाया होते हैं। कई बार तो ऐसे लोगों को भी मैसेज हो जाते हैं जिन्होंने पूर्व में कर का भुगतान कर दिया है। हम इस व्यवस्था में सुधार का प्रयास कर रहे हैं। गलत नोटिस और गलत पते पर नोटिस कैसे जारी हो गए, इसकी जांच भी करवा रहे हैं। -निरंजनसिंह चौहान, राजस्व प्रभारी नगर निगम
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