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नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर के रेसीडेंसी क्षेत्र को पहली बार राजस्व रिकार्ड में दर्ज करने की दिशा में जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार के नक्शा अभियान के तहत करीब 730 एकड़ भूमि को नजूल घोषित कर प्रथम प्रकाशन जारी किया गया, जिसके बाद जमीन पर काबिज लोगों और रहवासियों से दावे-आपत्तियां मांगी गईं। मालिकाना हक को लेकर कुल 370 आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। जिसका प्रस्ताव तैयार कर कलेक्टर को भेजा जाएगा। रेसीडेंसी क्षेत्र लंबे समय से स्पष्ट राजस्व रिकार्ड के अभाव में विवादों में रहा है। शासन द्वारा पहले ही इस भूमि को सरकारी घोषित किया जा चुका है, जिसके आधार पर इसे नजूल मद में दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
हालांकि कई रहवासियों ने 1956 से पूर्व के दस्तावेजों के आधार पर निजी स्वामित्व का दावा किया है। रतलाम कोठी, धार कोठी सहित कई पुराने परिसरों के निवासियों ने दस्तावेजों के साथ आपत्तियां प्रस्तुत की हैं। जूनी इंदौर तहसील के नायब तहसीलदार कमलेश कुशवाह ने बताया कि दावे और आपत्तियां प्राप्त हो चुकी हैं और अब उनकी सुनवाई कर निराकरण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। प्रस्ताव कलेक्टर को भेजा जाएगा, जिनके आदेश के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। आजाद नगर क्षेत्र से कोई आपत्ति नहीं आई, जबकि शासकीय भूमि को लेकर भी कोई विवाद सामने नहीं आया है। क्षेत्र की कई पुरानी लीज की अवधि समाप्त होने और भू-भाटक बकाया होने के मामलों की भी समीक्षा की जाएगी।
ड्रोन सर्वे के बाद तेज हुई प्रक्रिया रेसीडेंसी क्षेत्र को राजस्व रिकार्ड में दर्ज करने के प्रयास कई वर्षों से चल रहे थे। वर्ष 2024 में ड्रोन सर्वे के माध्यम से पूरे क्षेत्र का नक्शा तैयार किया गया और लोगों से स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज भी एकत्र किए गए थे। इसके बावजूद मामला लंबित था। अब नक्शा अभियान के तहत भूमि को अस्थायी रूप से सरकारी घोषित कर दावा आपत्ति की प्रक्रिया शुरू की गई है। वर्षों से रिकार्ड में दर्ज नहीं क्षेत्र इस विस्तृत क्षेत्र में कई कालोनियां, कोठियां, सरकारी बंगले, उद्यान, अस्पताल परिसर, चिड़ियाघर और आवासीय इलाके शामिल हैं। स्पष्ट रिकार्ड न होने से प्रशासन और निजी धारकों के बीच लंबे समय से विवाद की स्थिति बनी हुई थी। पूरे क्षेत्र को नजूल भूमि घोषित कर प्रथम प्रकाशन इसी उलझन को सुलझाने के लिए जारी किया गया।
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