
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ और बढ़ती वैश्विक व्यापारिक अनिश्चितताओं के बावजूद मध्य प्रदेश ने निर्यात के मोर्चे पर उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है।
राज्य के सबसे बड़े निर्यात बाजार अमेरिका में निर्यात में गिरावट दर्ज होने के बावजूद अन्य देशों में बढ़ी मांग ने इस कमी की भरपाई कर दी। परिणामस्वरूप वित्त वर्ष 2025-26 में मध्य प्रदेश का कुल निर्यात 4 प्रतिशत बढ़कर 68,837 करोड़ रुपये पहुंच गया।
एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर इंडस्ट्रीज की रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश से अमेरिका को होने वाला निर्यात 2024-25 में 20.4 प्रतिशत हिस्सेदारी के मुकाबले 2025-26 में घटकर 19.4 प्रतिशत रह गया। अमेरिका में ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीति और व्यापारिक अनिश्चितताओं का असर राज्य के निर्यात पर भी दिखाई दिया।
अमेरिकी बाजार में आई सुस्ती के बीच दक्षिण अफ्रीका, चीन, जर्मनी और यूरोपीय देशों में बढ़ती मांग ने मध्य प्रदेश के निर्यात को नई दिशा दी। आंकड़ों के अनुसार चीन में राज्य के निर्यात की हिस्सेदारी 2.17 प्रतिशत से बढ़कर 3.11 प्रतिशत हो गई। दक्षिण अफ्रीका में यह 1.40 प्रतिशत से बढ़कर 2.33 प्रतिशत पहुंच गई। जर्मनी में हिस्सेदारी 3.30 प्रतिशत से बढ़कर 3.61 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि यूरोप में भी 3.63 प्रतिशत से बढ़कर 3.88 प्रतिशत हो गई।
राज्य के कुल निर्यात में इंदौर की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही। प्रदेश के कुल 68,837 करोड़ रुपये के निर्यात में से 34,654 करोड़ रुपये का योगदान अकेले इंदौर का रहा। यह कुल निर्यात का 50.5 प्रतिशत है।
रिपोर्ट के मुताबिक, कनाडा में हिस्सेदारी 7.21 प्रतिशत से घटकर 5.90 प्रतिशत रह गई। फ्रांस में यह 3.69 प्रतिशत से घटकर 3.53 प्रतिशत हो गई। न्यूजीलैंड में भी हिस्सेदारी 2.95 प्रतिशत से घटकर 2.62 प्रतिशत दर्ज की गई। ब्राजील में भी मामूली गिरावट देखने को मिली और हिस्सेदारी 2.18 प्रतिशत से घटकर 2.38 प्रतिशत के आसपास रही।
मध्य प्रदेश के 147 प्रमुख निर्यात उत्पादों में फार्मा क्षेत्र सबसे आगे रहा। कुल निर्यात में इसकी हिस्सेदारी 19.2 प्रतिशत रही। इसके अलावा गारमेंट, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि आधारित उत्पाद और इंजीनियरिंग सामान की मांग भी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बनी रही।
निर्यात विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी टैरिफ और वैश्विक व्यापारिक चुनौतियों के बावजूद मध्य प्रदेश की कंपनियों ने नए बाजारों की तलाश कर निर्यात को स्थिर बनाए रखा। विविध देशों में बढ़ती मांग और उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता के कारण राज्य ने कठिन परिस्थितियों में भी निर्यात वृद्धि हासिल की।