भोजशाला मामला: मस्जिद पक्ष को मिलेगी 98 दिन चले सर्वे की वीडियोग्राफी, हाई कोर्ट ने ASI को दिया आदेश
हाई कोर्ट के आदेश के बाद धार भोजशाला में 98 दिन चले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) सर्वे की वीडियोग्राफी मौलाना कलामुद्दीन वेलफेयर सोसायटी (मस्जिद ...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 21 Apr 2026 08:07:55 PM (IST)Updated Date: Tue, 21 Apr 2026 08:07:55 PM (IST)
भोजशाला मामला: मस्जिद पक्ष को मिलेगी 98 दिन चले सर्वे की वीडियोग्राफीनईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। हाई कोर्ट के आदेश के बाद धार भोजशाला में 98 दिन चले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) सर्वे की वीडियोग्राफी मौलाना कलामुद्दीन वेलफेयर सोसायटी (मस्जिद पक्ष) को भी मिलेगी। हाई कोर्ट ने एएसआइ से कहा कि वह 27 अप्रैल से पहले वीडियोग्राफी गूगल ड्राइव पर अपलोड करे और कोर्ट और सोसायटी को इसका पासवर्ड उपलब्ध कराए।
मंगलवार को सोसायटी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने तर्क रखे। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सोसायटी को सर्वे के संबंध में आपत्ति दर्ज कराने की अनुमति दी है, लेकिन सर्वे की वीडियोग्राफी नहीं होने से हम आपत्ति दर्ज नहीं करा पा रहे हैं। एएसआइ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील जैन ने इस पर आपत्ति ली। दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने एएसआइ को आदेश दिया कि वह सर्वे की वीडियोग्राफी अपलोड करे।
अंतिम फैसले पर रोक और याचिका की वैधता पर सवाल
खुर्शीद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला जैसे मामलों में अंतिम फैसला सुनाने पर रोक लगा रखी है। उन्होंने अपनी बात के समर्थन में न्यायदृष्टांत भी प्रस्तुत किए। कहा कि पूरा विवाद स्वामित्व को लेकर है, लेकिन ऐसे मामले रिट याचिका के माध्यम से निराकृत नहीं किए जा सकते। हिंदू फ्रंट फार जस्टिस की याचिका सुनवाई योग्य ही नहीं है, इसे निरस्त किया जाए। सलमान खुर्शीद ने मंगलवार दोपहर ढाई बजे से तर्क रखे। सुनवाई लगभग दो घंटे चली। खुर्शीद के तर्क अधूरे रहे जिन्हें वे बुधवार को पूरा करेंगे। सुनवाई के दौरान अयोध्या राम जन्म भूमि विवाद का उल्लेख भी हुआ। खुर्शीद ने कहा कि हिंदू फ्रंट फार जस्टिस के वकील ने अपनी बहस में अयोध्या फैसले का बार-बार उल्लेख किया। वे भी अयोध्या फैसले का सम्मान करते हैं और इस संबंध में बुधवार को अपनी बात रखेंगे।
न्यायिक प्रक्रिया और जिला कोर्ट का हवाला
खुर्शीद ने कहा कि स्वामित्व से जुड़े सिविल मामले पहले जिला कोर्ट फिर अपील कोर्ट और फिर हाई कोर्ट पहुंचते हैं, लेकिन भोजशाला मामले में सीधे हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी गई जबकि भोजशाला विवाद को लेकर जिला कोर्ट में पहले से एक वाद चल रहा है। हाई कोर्ट में सीधे याचिका दायर करने का कोई मतलब नहीं है, इसे निरस्त किया जाना चाहिए। खुर्शीद ने तर्क रखते हुए कहा कि विवाद वर्ष 2003 के एएसआइ के आदेश को लेकर है जिसमें हिंदू पक्ष को मंगलवार को पूजा और मुस्लिम पक्ष को शुक्रवार को नमाज की अनुमति दी गई थी। हिंदू फ्रंट फार जस्टिस ने 24 घंटे पूजा के अधिकार की मांग करते हुए याचिका प्रस्तुत की है। याचिका एएसआइ के आदेश के 19 वर्ष बाद प्रस्तुत हुई है। यह समय सीमा से बाहर है, इसे निरस्त किया जाना चाहिए।