
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। राज्य शासन ने स्थायी पदोन्नति का रास्ता क्या खोला, बरसों से दबा इंतजार और नाराजगी दोनों एक साथ बाहर आ गए। शनिवार को वरिष्ठता सूची जारी हुई तो कई पुलिसकर्मियों के चेहरे खिल उठे, लेकिन सैकड़ों के चेहरे उतर गए। आलम यह रहा कि रविवार की छुट्टी पर भी पलासिया स्थित कार्यालय में शिकायती आवेदनों के साथ पुलिसकर्मियों की भीड़ उमड़ पड़ी।
चर्चा है कि पात्र होने के बावजूद 200 से ज्यादा नाम सूची से गायब मिले, जबकि 1168 आरक्षकों का प्रधान आरक्षक बनने का रास्ता साफ हो गया। अब सवाल यह है कि सूची में जगह किसे मिली और कौन छूट गया। नाराज पुलिसकर्मियों ने स्थापना शाखा और कमेटी पर लापरवाही का आरोप लगाया है। अब सबकी नजर संशोधित सूची पर है, ताकि छूटी हुई किस्मत भी ड्यूटी पर लौट सके। विभागीय जांच और गड़बड़ी में फंसे पुलिसकर्मी तो वैसे ही अलग कर दिए गए है।
राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज होते ही थानों में जीरो एफआइआर तो तेजी से लिखी जा रही हैं, लेकिन उसके बाद फाइलें कछुआ चाल से चलती हैं। सैकड़ों प्रकरणों में विवेचना की रफ्तार रोजनामचा की एंट्री और आमद-रवानगी तक ही सीमित होकर रह गई है। फरियादी कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठे हैं और फाइलें अलमारी की शोभा बढ़ा रही हैं।
इधर डीजीपी कैलाश मकवाणा ने 25 हजार रुपये तक के साइबर फ्राड में जीरो एफआइआर दर्ज करने के निर्देश देकर पीड़ितों को त्वरित राहत का रास्ता खोला है। लेकिन सवाल यह है कि एफआइआर दर्ज होने के बाद उसका अंजाम कौन तक पहुंचाएगा? कमिश्नरेट के चारों जोन में 1236 केस दर्ज हुए है। सबसे ज्यादा एफआइआर जोन-2 की है। एक विवेचक को तीन तीन केस तो दे दिए पर तकनीकी जांच के संबंध में पूछा तक नहीं।
ड्रग्स प्रकरण में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के भाई कुलभूषण उर्फ नाना पटवारी को लेकर पुलिस महकमे में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। पैडलर के बयान, कथित लेनदेन और काल डिटेल जैसे बिंदुओं पर पूछताछ तो हुई, लेकिन जांच अभी तक आरोप तय करने की स्थिति तक नहीं पहुंची। इसी वजह से सवाल उठ रहे हैं कि मामला सिर्फ पड़ताल का है या जांच की रफ्तार कहीं अटक गई है।
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वर्ष 2020 के उस चर्चित प्रकरण की भी याद दिला रहे हैं, जिसमें नाना के करीबी सोहन उर्फ जोजो ने मेमोरेंडम में नाना का नाम लिया और ड्रग्स खरीदी बिक्री की एक एक बात बता दी। तत्कालीन टीआइ तहजीब काजी ने अफसरों को गुमराह कर मामला दबा दिया। इस बार भी मामला मेमोरेंडम तक ही सीमित रह गया और नाना को कथन लेकर छोड़ना पड़ा।