
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। भागीरथपुरा की दुखद घटना के बाद इंदौर नगर निगम अब शहर की जलापूर्ति व्यवस्था को पूरी तरह दुरुस्त करने के मिशन में जुट गया है। शनिवार को महापौर पुष्यमित्र भार्गव की अध्यक्षता में आयोजित महापौर परिषद (MIC) की बैठक में शहर के विकास और विशेष रूप से जल सुधार के लिए 1500 करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई। बैठक में आयुक्त क्षितिज सिंघल सहित परिषद के सभी सदस्य और विभागीय प्रमुख मौजूद रहे।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बैठक की शुरुआत में शहर की भविष्य की जरूरतों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इंदौर की आगामी 60 लाख की अनुमानित जनसंख्या को ध्यान में रखते हुए नर्मदा के चौथे चरण की योजना को प्रभावी बनाना आवश्यक है। इसके लिए शहर में नई टंकियों के निर्माण के साथ-साथ पुरानी टंकियों की जल संग्रहण और वितरण क्षमता को बढ़ाना अनिवार्य हो गया है। पुरानी और जर्जर लाइनों को बदलकर बेहतर नेटवर्क तैयार किया जाएगा।
बैठक में अमृत प्रोजेक्ट के तहत 40 नवीन पेयजल टंकियों के निर्माण के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। साथ ही, 75 से अधिक पुरानी टंकियों से जुड़ी वितरण लाइनों को भी बदला जाएगा।
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जलापूर्ति के अलावा शहर की स्वच्छता और हरियाली को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। नगरीय सीमा के मुख्य मार्गों और लिंक रोड की सफाई के लिए 175 करोड़ की लागत से 30 नई रोड स्वीपिंग मशीनें किराए पर लेने के टेंडर को स्वीकृति दी गई। इसके अतिरिक्त, शहर के शासकीय उद्यानों, ग्रीन बेल्ट, चौराहों और रोटरी के रखरखाव के लिए एक नई पहल शुरू की गई है। अब रजिस्टर्ड संस्थाएं और कॉर्पोरेट समूह इन्हें 'गोद' लेकर इनका विकास और रख-रखाव कर सकेंगे।