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एमपी के किसानों को बड़ी राहत... केंद्र की खरीदी दर बढ़ते ही 300 रुपये प्रति क्विंटल महंगा हुआ प्याज

किसानों और व्यापारियों ने फैसले का स्वागत किया, हालांकि छोटे किसानों ने खरीदी समय पर शुरू करने की मांग उठाई।

By Rais MohammadEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Mon, 06 Jul 2026 05:07:01 PM (IST)Updated Date: Mon, 06 Jul 2026 05:07:01 PM (IST)
एमपी के किसानों को बड़ी राहत... केंद्र की खरीदी दर बढ़ते ही 300 रुपये प्रति क्विंटल महंगा हुआ प्याज
प्याज खरीदी दर में 13 प्रतिशत बढ़ोतरी।

HighLights

  1. बदनावर मंडी में भाव 300 रुपये बढ़े
  2. दो लाख टन खरीदेगी केंद्र सरकार
  3. किसानों ने फैसले का स्वागत किया

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। लगातार गिरते दामों से नुकसान झेल रहे प्याज उत्पादक किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। किसानों की नाराजगी और बाजार में बनी मंदी के बीच केंद्र सरकार ने बफर स्टॉक के लिए प्याज की खरीदी दर में 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है। इस निर्णय का असर लागू होने के दूसरे ही दिन मध्य प्रदेश की बदनावर मंडी में दिखाई दिया, जहां प्याज के भाव 200 से 300 रुपये प्रति क्विंटल तक बढ़ गए। इससे किसानों में बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद जगी है।

1875 से बढ़ाकर 2125 रुपये प्रति क्विंटल हुई खरीदी

सरकार ने बफर स्टॉक के लिए प्याज की खरीदी दर 1875 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 2125 रुपये प्रति क्विंटल (21.25 रुपये प्रति किलो) कर दी है। नई दरें 4 जुलाई से लागू हो चुकी हैं और सरकारी एजेंसियां इसी मूल्य पर किसानों से प्याज की खरीदी कर रही हैं।


केंद्र सरकार ने इस वर्ष बफर स्टॉक के लिए दो लाख टन प्याज खरीदने का लक्ष्य निर्धारित किया है। माना जा रहा है कि इस निर्णय से बाजार में मांग को मजबूती मिलेगी और किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त होगा।

पर्याप्त स्टॉक के बावजूद बाजार को मिला सहारा

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अनुसार देश में प्याज की कोई कमी नहीं है। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। इन राज्यों में बफर स्टॉक के लिए खरीदी भी सुचारू रूप से जारी है। इसके बावजूद सरकारी हस्तक्षेप ने बाजार में सकारात्मक माहौल बनाया है और कीमतों को सहारा मिला है।

बदनावर मंडी में दिखा फैसले का असर

सरकारी फैसले की गूंज सोमवार को बदनावर की सब्जी मंडी में साफ दिखाई दी। यहां प्याज के भाव में 200 से 300 रुपये प्रति क्विंटल तक की तेजी दर्ज की गई। मंडी में करीब 20 से 25 हजार कट्टों की आवक रही, जो शनिवार की तुलना में कम थी।

अच्छी गुणवत्ता का प्याज 2400 से 2500 रुपये प्रति क्विंटल तक बिका, जबकि मीडियम और सुपर एवरेज गुणवत्ता वाले प्याज के दाम 1700 से 2000 रुपये प्रति क्विंटल रहे। सामान्य गुणवत्ता का प्याज भी करीब 1000 रुपये प्रति क्विंटल तक बिकता रहा।

कई राज्यों में भेजा जा रहा मालवा का प्याज

बदनावर की सब्जी मंडी से प्याज उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, गुजरात, राजस्थान और दिल्ली सहित देश के कई राज्यों में भेजा जा रहा है।

व्यापारियों के अनुसार मालवा का देशी प्याज अपनी टिकाऊ गुणवत्ता के कारण जुलाई से अक्टूबर तक बाजार में अच्छी मांग बनाए रखता है। इसके बाद गुजरात में नए प्याज की आवक शुरू होती है, जबकि मालवा का नया उत्पादन नवंबर से बाजार में आता है। इस वर्ष उत्पादन अपेक्षाकृत कम रहने से भी बाजार में भाव मजबूत रहने की संभावना जताई जा रही है।

व्यापारियों ने सरकारी दखल को बताया फायदेमंद

प्याज व्यापारी कमल पाटीदार ने कहा कि नेफेड की खरीदी शुरू होने के बाद बाजार में करीब 300 रुपये प्रति क्विंटल तक तेजी आई है और फिलहाल बड़ी गिरावट की संभावना नहीं है।

सब्जी मंडी व्यापारी जयंतीलाल पाटीदार का कहना है कि सरकारी खरीदी से बाजार को मजबूत आधार मिला है और जो प्याज कुछ दिन पहले कम कीमत पर बिक रहा था, अब उसे बेहतर दाम मिलने लगे हैं।

व्यापारी अर्जुन पाटीदार के अनुसार यदि घरेलू बाजार में प्याज की आवक नियंत्रित रही तो भाव और मजबूत हो सकते हैं। वहीं आवक बढ़ने की स्थिति में भी नेफेड की खरीदी बाजार को संतुलित बनाए रखने में मदद करेगी।

सब्जी मंडी एसोसिएशन के अध्यक्ष जीवन पटेल ने बताया कि नेफेड किसानों से अपेक्षाकृत ऊंचे दाम पर प्याज खरीदकर बफर स्टॉक तैयार करता है। बाद में जरूरत पड़ने पर यही स्टॉक उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर उपलब्ध कराया जाता है। इससे किसानों की आय को सहारा मिलने के साथ बाजार में कीमतों का संतुलन भी बना रहता है।

किसानों ने फैसले का किया स्वागत

खाचरौदा के किसान संजय पाटीदार, खेड़ावदा के किशोर धाकड़ और मऊ के महेंद्रसिंह ने सरकार के फैसले का स्वागत किया है। हालांकि उनका कहना है कि यदि सरकारी खरीदी पहले शुरू हो जाती तो छोटे किसानों को अधिक लाभ मिलता।

किसानों के मुताबिक अधिकांश छोटे उत्पादक भंडारण की सुविधा नहीं होने के कारण कम दाम पर अपनी फसल बेच चुके हैं। अब बाजार भाव सरकारी खरीदी दर से ऊपर पहुंच गए हैं, इसलिए जिन किसानों के पास अभी भी प्याज का स्टॉक है, वे मंडियों में बिक्री को प्राथमिकता दे रहे हैं। किसानों ने भविष्य में समय पर सरकारी खरीदी शुरू करने की मांग भी उठाई है, ताकि उन्हें औने-पौने दाम पर फसल बेचने की मजबूरी न रहे।