
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। आपराधिक मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए एक सेशन कोर्ट-एक एजीपी का फार्मूला महीनों पहले स्वीकृत हो चुका है, लेकिन यह व्यवस्था अब तक लागू नहीं हो सकी है। इंदौर जिले में 48 सेशन कोर्ट होने के बावजूद अभियोजन की ओर से पैरवी करने के लिए सिर्फ 11 अतिरिक्त लोक अभियोजक (एजीपी) ही पदस्थ हैं। ऐसे में एक एजीपी को तीन से चार सेशन कोर्ट का काम संभालना पड़ रहा है, जिससे गंभीर मामलों की सुनवाई प्रभावित हो रही है।
इंदौर जिले में कुल 48 सेशन कोर्ट हैं। इनमें से 40 इंदौर जिला न्यायालय में, पांच आंबेडकर नगर (महू) में, दो सांवेर में और एक देपालपुर में संचालित हैं। करीब आठ महीने पहले शासन ने प्रत्येक सेशन कोर्ट में अलग-अलग एजीपी नियुक्त करने की व्यवस्था को मंजूरी दी थी, लेकिन इसे अभी तक लागू नहीं किया जा सका है।
कई कोर्ट में एजीपी ही नहीं
इंदौर जिला न्यायालय के 40 सेशन कोर्ट में फिलहाल सिर्फ 10 एजीपी काम कर रहे हैं। वहीं आंबेडकर नगर (महू) में एक एजीपी पदस्थ हैं। देपालपुर और सांवेर न्यायालय में अभियोजन की ओर से पैरवी के लिए कोई एजीपी नहीं है। इन स्थानों पर एडीपीओ को ही अभियोजन पक्ष रखना पड़ रहा है।
सुनवाई पर पड़ रहा असर
सेशन कोर्ट में हत्या, हत्या के प्रयास और दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई होती है। इन मामलों में सुनवाई अक्सर लंबी चलती है। मौजूदा व्यवस्था में एक एजीपी के पास औसतन चार कोर्ट की जिम्मेदारी है। जब एजीपी किसी एक कोर्ट में गंभीर मामले की पैरवी में व्यस्त होते हैं, तो अन्य कोर्ट में मामलों की सुनवाई टालनी पड़ती है। इसका असर यह होता है कि न्याय की उम्मीद लेकर पहुंचे पीड़ित पक्ष को अगली तारीख देकर लौटना पड़ता है।
इंदौर से उठी थी मांग
एक सेशन कोर्ट में एक एजीपी नियुक्त करने की मांग सबसे पहले इंदौर से उठी थी। शहर के अधिवक्ताओं ने विभिन्न मंचों पर ज्ञापन देकर लंबे समय तक इस मांग को उठाया था। इसके बाद शासन ने इस नीति को मंजूरी दे दी थी। कलेक्टर कार्यालय ने एजीपी बनने के इच्छुक वकीलों से आवेदन भी मंगवाए, लेकिन इसके बाद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
सिविल मामलों में भी परेशानी
एजीपी केवल आपराधिक मामलों में ही नहीं, बल्कि शासन से जुड़े सिविल मामलों में भी पैरवी करते हैं। पर्याप्त संख्या में एजीपी नियुक्त नहीं होने के कारण सिविल मामलों की सुनवाई में भी दिक्कतें सामने आ रही हैं।
इंदौर को नहीं मिल रहा लाभ
पूर्व लोक अभियोजक विमल मिश्रा के अनुसार, एक सेशन कोर्ट-एक एजीपी की मांग इंदौर से उठी थी और इसके लिए कई ज्ञापन दिए गए थे। स्वीकृति मिलने के बावजूद इंदौर को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। उनका कहना है कि यदि पर्याप्त संख्या में एजीपी नियुक्त किए जाएं तो पीड़ित पक्षकारों को राहत मिलेगी और त्वरित न्याय की अवधारणा साकार हो सकेगी।
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