इंदौर: दिखावे की शादियों पर राजपूत समाज का कड़ा प्रहार, कर्ज और फिजूलखर्ची छोड़ सामूहिक विवाह अपनाएंगे 73 जोड़े
राजपूत समाज स्वयंसिद्ध मुहूर्त अक्षय तृतीया पर फिजूलखर्ची और कुरीतियों पर प्रहार करेगा। इसका माध्यम पहली बार हतोद के समीप कांकरिया बोडिया में हो रहे 7 ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 16 Apr 2026 08:26:44 PM (IST)Updated Date: Thu, 16 Apr 2026 08:26:44 PM (IST)
राजपूत समाज की नई पहल। (AI से जेनरेट किया गया इमेज)HighLights
- राजपूत समाज का बड़ा फैसला
- अब कर्ज लेकर नहीं करेंगे शादी
- सामूहिक विवाह से बचाएंगे पैसा
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। राजपूत समाज स्वयंसिद्ध मुहूर्त अक्षय तृतीया पर फिजूलखर्ची और कुरीतियों पर प्रहार करेगा। इसका माध्यम पहली बार हतोद के समीप कांकरिया बोडिया में हो रहे 73 जोड़ों का सामूहिक विवाह बनेगा। इसमें समाज के मध्यम वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के परिवारों के जोड़ों का निःशुल्क विवाह किया जाएगा। आयोजन की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
मालवा राजपूत विकास समिति के मांगू सिंह पहलवान ने बताया कि इंदौर जैसे महानगर में विवाह दिखावे का पर्याय बन चुकी है। ऐसे में राजपूत समाज ने फिजूलखर्ची और सामाजिक कुरीतियों को दूर करने की पहल की है।
सामाजिक समरसता और एकजुटता का नवाचार
इंदौर जिला राजपूत बाहुल्य क्षेत्र है, जहां लगभग 400 गांवों में समाज की सघन आबादी है। समाज में शादियों पर होने वाले भारी-भरकम खर्च और कर्ज की परंपरा को तोड़ने के लिए यह 'नवाचार' किया है। यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और एकजुटता के रूप में देखा जा रहा है। धन-संपदा और संपन्नता के साथ मानवी और सामाजिक पहल परिवारों को आर्थिक रूप से मजबूती प्रदान करेगी।
नवयुगलों को भेंट की जाएगी गृहस्थी की सामग्री
छोटाबागड़ा के कृष्णा पटेल एवं धन सिंह राठौड़ के अनुसार, प्रत्येक नवयुगल को गृहस्थी के 36 बर्तन, पलंग-गादी, लोहे की अलमारी और चांदी की अंगूठी भेंट की जाएगी। 50 हजार वर्ग फीट के क्षेत्र में दूल्हा-दुल्हन के लिए पारंपरिक हवन कुंड और फेरे की व्यवस्था की गई है।
समाज के कमलेश्वर सिंह सिसोदिया बताते हैं कि विवाह की शुरुआत सुबह 8 बजे गणेश पूजन से होगी और विदाई के लिए दोपहर 2 से 3.30 बजे का समय रखा गया है। समाज में सामूहिक विवाह की नींव 80 के दशक में धार जिले के पिपलिया से पड़ी थी, जो संभवतः प्रदेश का पहला आयोजन था। इसके बाद धार, नागदा, घटाबिल्लौद और अब उज्जैनी जैसे क्षेत्रों में यह परंपरा निरंतर जारी है।
25 जोड़ों को भेंट की अभिमंत्रित साड़ियां एवं सुहाग सामग्री
नवलखा स्थित कांटाफोड़ शिव मंदिर ट्रस्ट एवं भक्त मंडली की ओर से 25 नवयुगलों को अभिमंत्रित साड़ियां एवं सुहाग सामग्री भेंट की गई। मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विष्णु बिंदल, टीकमचंद गर्ग एवं संयोजक बीके गोयल ने बताया कि प्रतिवर्ष नवरात्रि में मंदिर समिति द्वारा भक्तों की ओर से मातारानी को समर्पित किए गए नूतन वस्त्रों को संरक्षित कर सुरक्षित रखा जाता है।
पंडितों के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच नूतन साड़ियां, अक्षत, कुमकुम एवं सुहाग सामग्री भेंट की गई। नवयुगलों को यशस्वी एवं मंगलमय दाम्पत्य जीवन के लिए शुभकामनाओं सहित उपहार भेंट किए।