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इंदौर में नंदानगर सिविल अस्पताल की सोनोग्राफी मशीन खराब, आईसीयू भी नहीं

Government Hospital Indore: अस्पताल में महिलाओं की डिलीवरी की जाती है, कई बार सीजर की नौबत भी आ जाती है। ऐसे में केस क्रिटिकल होने पर अस्पताल में आईसी...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Fri, 18 Sep 2026 01:18:41 PM (IST)Updated Date: Fri, 18 Sep 2026 01:23:07 PM (IST)
इंदौर में नंदानगर सिविल अस्पताल की सोनोग्राफी मशीन खराब, आईसीयू भी नहीं
नंदानगर सिविल अस्पताल।

HighLights

  1. एक्सरे मशीन तो आ गई लेकिन इंस्टाल नहीं
  2. अस्पताल में लैब का काम पूरा होना बाकी
  3. महिलाओं को सोनोग्राफी की आवश्यकता होती है

नीरज व्यास, नईदुनिया, इंदौर। नंदानगर अस्पताल का चार मंजिला भवन लगभग 8.66 करोड़ रुपये की लागत से बनकर तैयार हुआ है। फरवरी 2026 में ही इसे शुरू किया गया है। बिल्डिंग निर्माण में काफी देरी होने के बाद अस्पताल की आनन-फानन में शुरू तो कर दिया, लेकिन इसमें कई सुविधाएं नहीं हैं।

पहले यह अस्पताल प्रसूति गृह के तौर पर संचालित किया जाता था। हालांकि अब यहां नई सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं, लेकिन कमियां भी बरकरार हैं। स्वास्थ्य व्यवस्था का एक्सरे अभियान के तहत नईदुनिया ने अस्पताल द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं और कमियों को बारीकी से परखने का प्रयास किया।


सिविल अस्पताल गाइडलाइन के अनुसार स्टाफ नहीं

अस्पताल की ओपीडी का समय सुबह नौ से दोपहर दो बजे तक और शाम पांच से छह बजे तय किया गया है। हालांकि सुबह 10 बजे तक ओपीडी शुरू नहीं हुई थी। यह 50 बेड का सिविल अस्पताल है और गाइडलाइन के मुताबिक यहां पर्याप्त स्टाफ की नियुक्ति नहीं की गई है। नियमों के अनुसार यहां 61 पदों की स्वीकृति है, लेकिन नियुक्ति सिर्फ 42 पदों पर की गई है।

हाल ही में यहां एक नेत्र रोग विशेषज्ञ और स्त्रीरोग विशेषज्ञ नियुक्त हुए हैं। हालांकि अभी भी एक एमडी, आर्थोपैडिक और ईएनटी स्पेशलिस्ट की आवश्यकता है। अस्पताल में रोज लगभग 100 गर्भवतियां जांच व इलाज के लिए आती हैं। लगभग 15 महिलाओं को सोनोग्राफी की आवश्यकता होती है। यहां मौजूद सोनोग्राफी मशीन खराब होने की वजह से इन महिलाओं को अन्य सरकारी अस्पतालों में भेजा जा रहा है।

एक्सरे की सीआर मशीन आ गई है और एक महीने पहले रेडियोग्राफर की नियुक्ति भी की जा चुकी है, लेकिन मशीन इंस्टाल नहीं होने से इसका लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल में लैब शुरू कर दी गई है, लेकिन प्लेटफार्म तैयार होने का इंतजार है।

अस्पताल में महिलाओं की डिलीवरी की जाती है, कई बार सीजर की नौबत भी आ जाती है। ऐसे में केस क्रिटिकल होने पर अस्पताल में आईसीयू ही उपलब्ध नहीं है। कई महिलाओं ने शिकायती लहजे में बताया कि हमारा इलाज करने के बजाय यहां से दूसरे अस्पताल रेफर करने को कहा जाता है।

मरीजों के लिए रैंप नहीं, बेसमेंट में आता है पानी

साढ़े आठ करोड़ की लागत से चार मंजिला अस्पताल तैयार तो कर दिया गया है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर कई कमियां सामने से ही नजर आती हैं। इतने बड़े अस्पताल के लिए सिर्फ एक ही लिफ्ट है। इमरजेंसी के हालात में मरीजों को उतारने के लिए रैंप ही नहीं बनाई गई है। शुरुआती दौर में ही कंस्ट्रक्शन की खराबी साफ दिखने लगी है। यहां बेसमेंट में जमीन से पानी ऊपर आ रहा है।

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सारी कमियों को दूर करने की कोशिश

अस्पताल में जल्द ही सारी सुविधाएं जुटा ली जाएंगी। सारी कमियों को हम दूर करने की कोशिश कर रहे हैं। आने वाले दिनों में मिल क्षेत्र के लिए यह एक महत्वपूर्ण अस्पताल होगा। - डॉ. रूपाली जोशी, प्रभारी, नंदानगर सिविल अस्पताल