शिक्षकों के प्रमोशन का रास्ता साफ, वेतन वृद्धि के साथ एरियर भी मंजूर, अब तीन किस्तों में शिक्षकों को मिलेगी बकाया राशि
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में करियर एडवांसमेंट स्कीम (केस) के तहत शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है। विश्वविद्यालय की विभिन्न अध्ययनशालाओं में पदस्थ शिक् ...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 22 Feb 2026 10:11:03 PM (IST)Updated Date: Mon, 23 Feb 2026 02:05:55 AM (IST)
DAVV पर बढ़ा आर्थिक बोझHighLights
- डीएवीवी के करीब दो दर्जन शिक्षकों को करियर एडवांसमेंट स्कीम में मिली पदोन्नति
- पदोन्नति के बाद 5 से 8 करोड़ रुपये का एरियर तीन किस्तों में चुकाएगा प्रशासन
- डेढ़ साल से लंबित थे मामले; अब वेतन वृद्धि के साथ वित्तीय स्थिति रहेगी संतुलित
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में करियर एडवांसमेंट स्कीम (केस) के तहत शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है। विश्वविद्यालय की विभिन्न अध्ययनशालाओं में पदस्थ शिक्षकों को पदोन्नति का लाभ दिया गया है, जिसमें आइएमएस, आइआइपीएस, आइईटी, ईएमआरसी और कम्प्यूटर साइंस सहित कई विभाग के शिक्षक शामिल हैं। पिछले डेढ़ साल में करीब दो दर्जन शिक्षकों का प्रमोशन हुआ है। इनमें लेक्चरार से रीडर, रीडर से एसोसिएट प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर से प्रोफेसर पद पर पदोन्नति शामिल है।
पदोन्नति का आधार और लंबित मामलों का निपटारा
करियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत शिक्षकों को सेवा अवधि, शोध कार्य और अन्य शैक्षणिक उपलब्धियों के आधार पर पदोन्नति दी जाती है। लंबे समय से लंबित मामलों के निपटारे के बाद अब कई शिक्षकों को इसका लाभ मिल पाया है। पदोन्नति के साथ वेतनमान में भी वृद्धि हुई है, जिसके चलते शिक्षकों को एरियर (बकाया राशि) देना तय हुआ है। इन पदोन्नतियों के कारण विश्वविद्यालय पर पांच से आठ करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ा है।
किस्तों में होगा एरियर का भुगतान
इतनी बड़ी राशि एक साथ देना विश्वविद्यालय के लिए चुनौती बन गया था। प्रशासन ने बीच का रास्ता निकाला है। अब शिक्षकों को पूरी राशि एकमुश्त देने के बजाय तीन किस्तों में भुगतान किया जाएगा। विश्वविद्यालय अधिकारियों के मुताबिक यह राशि डेढ़ से दो साल के भीतर चरणबद्ध तरीके से जारी की जाएगी।
वित्तीय संतुलन और शिक्षकों की सहमति
इस प्रस्ताव पर शिक्षकों ने भी सहमति जताई है। उनका कहना है कि किस्तों में भुगतान से विश्वविद्यालय पर अचानक आर्थिक दबाव नहीं पड़ेगा। प्रशासन का मानना है कि इस निर्णय से विश्वविद्यालय की वित्तीय स्थिति संतुलित रहेगी और शिक्षकों के हित भी सुरक्षित रहेंगे।