MP में हजारों नर्सिंग विद्यार्थियों को राहत की उम्मीद, कॉलेजों को संबद्धता के लिए 10 मार्च तक करना होंगे आवेदन
उच्च शिक्षा विभाग और मध्य प्रदेश नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल के निर्देश के बाद इन कॉलेजों को संबंधित राज्य विश्वविद्यालय के अधीन लाने का फैसला लिया गय ...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 04 Mar 2026 05:51:00 PM (IST)Updated Date: Wed, 04 Mar 2026 05:56:01 PM (IST)
मध्य प्रदेश के नर्सिंग कॉलेज।HighLights
- इंदौर-धार और झाबुआ के 25 के आधा दर्जन कोर्स, 13 हजार विद्यार्थी बढ़े।
- सरकारी, निजी नर्सिंग कॉलेजों को प्रक्रिया के तहत नई संबद्धता लेनी होगी।
- कॉलेजों को पाठ्यक्रम बताना है। ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया चल रही है।
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। 2026-27 सत्र से इंदौर, धार और झाबुआ के 25 से अधिक नर्सिंग कालेज अब देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (डीएवीवी) से संबद्ध होंगे। इस बड़े बदलाव से हजारों विद्यार्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है। पिछले कुछ वर्षों से परीक्षा आयोजित करने और परिणाम घोषित करने में देरी जैसी समस्याएं सामने आ रही थीं, जिससे छात्रों को आगे की पढ़ाई और नौकरी के अवसरों में परेशानी होती थी।
उच्च शिक्षा विभाग और मध्य प्रदेश नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल के निर्देश के बाद इन कॉलेजों को संबंधित राज्य विश्वविद्यालय के अधीन लाने का फैसला लिया गया। डीएवीवी की शैक्षणिक परिषद की बैठक में प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने संबद्धता को लेकर प्रक्रिया शुरू कर दी। अधिकारियों के मुताबिक 13 हजार विद्यार्थी बढ़ गए।
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डीएवीवी कॉलेज विकास परिषद के डीन सचिन शर्मा के मुताबिक सभी सरकारी और निजी नर्सिंग कॉलेजों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत नई संबद्धता लेनी होगी। विश्वविद्यालय ने इसके लिए पांच प्रकार की फीस संरचना तय की है। कॉलेजों को अपने-अपने पाठ्यक्रमों के बारे में बताना है। इन दिनों ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया चल रही है।
आवेदन मिलने के बाद तीन सदस्यीय निरीक्षण दल कॉलेजों का दौरा करेगा। इस टीम में नर्सिंग कॉलेजों के प्राचार्य या सेवानिवृत्त शिक्षक और डीएवीवी का एक प्रतिनिधि शामिल होगा। यह दल कालेज की इमारत, प्रयोगशालाओं, शिक्षकों की उपलब्धता, उपकरणोंहै। और अन्य शैक्षणिक सुविधाओं की जांच करेगा। रिपोर्ट संतोषजनक मिलने पर ही संबद्धता प्रदान की जाएगी।
इस निर्णय का असर बीएससी नर्सिंग, एमएससी नर्सिंग, बैचलर आफ फिजियोथेरेपी, बैचलर आफ आक्यूपेशनल थेरेपी और मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलाजी जैसे कोर्स पर पड़ेगा। विश्वविद्यालय का कहना है कि नए सिस्टम से परीक्षाएं समय पर होंगी। परिणाम में देरी नहीं होगी और दस्तावेजों की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और जवाबदेह बनेगी।