इंदौर में प्रशासन की मनमानी से आधा हुआ व्यापार, व्यापारी बोले बंद करवा दो छावनी मंडी
इंदौर की छावनी मंडी में एक गेट दो साल से बंद है और अनाज वाहनों के आने-जाने का समय दोपहर 12 से शाम 5:30 तय करने से किसान परेशान हैं। ...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 26 Apr 2026 09:30:18 AM (IST)Updated Date: Sun, 26 Apr 2026 09:32:34 AM (IST)
इंदौर छावनी मंडी की फाइल फोटो।HighLights
- रैली-जुलूस के ट्रैफिक पर आंख बंद, किसानों की गाड़ियां रोकने की जिद
- किसान चार-चार घंटे इंदौर शहर के बाहर खड़े रहने को मजबूर
- इंदौर की छावनी मंडी में सिर्फ 8-10 हजार बोरी गेहूं की आवक हो रही
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। प्रशासन के मनमाने नियमों के कारण प्रदेश की व्यापारिक राजधानी इंदौर की मंडी में कारोबार प्रभावित हो रहा है। कभी प्रदेश की प्रमुख मंडी में शामिल होने वाली छावनी अनाज मंडी में व्यापार आधा हो गया है। हाल ये है कि आसपास के छोटे शहरों की मंडियों में अब इंदौर से ज्यादा व्यापार हो रहा है।
दिन-ब-दिन घटते व्यापार और समस्या पर आंख मूंद कर बैठे अधिकारियों से नाराज व्यापारियों ने कहा है कि इससे अच्छा तो मंडी को डिनोटिफाइड कर बंद ही कर दिया जाए। मंडी प्रशासन ने छावनी मंडी का एक गेट दो साल से बंद कर रखा है। दूसरी ओर शहर की ट्रैफिक समस्या से पार नहीं पाने वाले जिला प्रशासन ने छावनी में अनाज लेकर आने-जाने वाले वाहनों का समय निर्धारित कर दिया है।
उपज की आवक के खास सीजन में बंदिशों ने व्यापार की कमर तोड़ दी है। हताश और परेशान व्यापारियों ने कहा है कि प्रशासन जुलूस और नेताओं की रैली से लगने वाले जाम पर आंख मूंद लेता है, लेकिन किसानों की उपज लाने वाली ट्रैक्टर-ट्राली और अनाज से भरे वाहन ही उसे शहर में जाम का प्रमुख कारण लग रहे हैं।
टाइम की बंदिश से देवास निकला आगे
इस समय गेहूं की उपज की मंडी में आवक का प्रमुख समय है। हाल ये है कि छावनी मंडी में हर दिन आठ से 10 हजार बोरी से ज्यादा गेहूं की आवक नहीं हो रही। जबकि देवास जैसी पड़ोसी मंडी जो इंदौर से छोटी मानी जाती थी वहां इस समय करीब 50 हजार बोरी गेहूं प्रतिदिन आ रहा है।
दरअसल प्रशासन ने इंदौर छावनी मंडी में आने के लिए वाहनों का समय दोपहर 12 से शाम 5:30 बजे तक तय कर रखा है। इसके बाद रात 9:30 से सुबह छह बजे तक वाहनों को एंट्री दी जा रही है। इंदौर अनाज तिलहन व्यापारी एसोसिएशन के मंत्री राजेश अग्रवाल के अनुसार रात नौ बजे बाद तो मंडी में व्यापार बंद हो जाता है।
ऐसे में किसान माल लेकर आएंगे तो उन्हें रातभर इंतजार करना होगा या सुबह छह बजे से पहले मंडी में पहुंचना होगा। इसके बाद जो उपज लेकर किसान आते हैं उन्हें चार-चार घंटे तक शहर के बाहर खड़ा कर दिया जाता है। ऐसे में परेशान होकर किसान इंदौर की मंडी से ही किनारा करने लगे हैं।
मंडी नहीं बसा सके तो समय बढ़ा दो
इंदौर की छावनी मंडी के लिए जमीन तलाशने के लिए सरकार और प्रशासन करीब आठ वर्ष से बातें कर रहा है। हालत ये है कि नेता-अधिकारी अब तक मंडी शिफ्ट करना तो दूर जमीन तक तय नहीं कर सके।
व्यापारियों के अनुसार अब कारोबार बचाने के लिए एसडीएम, कलेक्टर से लेकर सभी अधिकारियों को आग्रह कर चुके हैं कि सिर्फ अनाज के वाहनों के लिए मंडी में आने-जाने का समय बढ़ा दिया जाए। यदि प्रशासन इतना भी नहीं कर सकता तो बेहतर है इंदौर में मंडी पूरी तरह बंद ही कर दी जाए।
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