
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने शुक्रवार को सिविल सेवा परीक्षा 2025 का अंतिम परिणाम घोषित कर दिया। इस बार कुल 958 पदों के लिए उम्मीदवारों का चयन किया गया है। इंदौर के 100 प्रतिशत दृष्टिबाधित अक्षत बलदवा ने अपने पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया 173वीं रैंक हासिल कर प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है। वहीं शहर की समीक्षा द्विवेदी ने 56वीं रैंक प्राप्त कर सफलता हासिल की है।
दृष्टिबाधित अक्षत ने पहले प्रयास में पाई सफलता
इंदौर निवासी अक्षत बलदवा बचपन से ही दृष्टिबाधित हैं, लेकिन पढ़ाई के प्रति उनका जुनून कभी कम नहीं हुआ। उन्होंने 11वीं और 12वीं तक की पढ़ाई सरकारी स्कूल से हिंदी माध्यम में पूरी की। इसके बाद उन्होंने कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (क्लैट) पास कर बेंगलुरु के नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी से एलएलबी की पढ़ाई की।
हिंदी माध्यम से पढ़ाई के बाद अचानक अंग्रेजी माहौल में पढ़ाई करना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। कॉलेज के अंतिम वर्ष में उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की। वर्ष 2025 में ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद उन्होंने पहला प्रयास दिया और ऑल इंडिया रैंक 173 हासिल कर ली।
अक्षत के पिता संजय बलदवा कंस्ट्रक्शन व्यवसाय से जुड़े हैं, जबकि उनकी मां मीना बीमा एजेंट हैं। अक्षत का कहना है कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में सफलता के लिए आत्मविश्वास और आत्मप्रेरणा बेहद जरूरी है।
पांचवें प्रयास में समीक्षा को मिली सफलता
इंदौर की समीक्षा द्विवेदी ने यूपीएससी में 56वीं ऑल इंडिया रैंक हासिल की है। उन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई एक निजी स्कूल से की और इसके बाद कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया। तीन साल तक सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करने के बाद उन्होंने एमबीए भी किया और कॉर्पोरेट क्षेत्र में अनुभव प्राप्त किया।
समीक्षा ने बताया कि नौकरी के दौरान उन्हें समाज के लिए कुछ करने की प्रेरणा मिली और उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी शुरू की। वर्ष 2020 से उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू की। 2023 में वह इंटरव्यू तक पहुंचीं, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो सका।
पांचवें प्रयास में सफलता
पांचवें प्रयास में उन्होंने प्रारंभिक, मुख्य और साक्षात्कार तीनों चरण सफलतापूर्वक पार कर ऑल इंडिया रैंक 56 हासिल की। समीक्षा ने बताया कि उनके पिता और पति ने उन्हें हर कदम पर प्रेरित किया।
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