नए अधिवक्ताओं को क्यों नहीं दिया जाता स्टायपंड, हाई कोर्ट ने शासन, बार कौंसिल आफ इंडिया और राज्य अधिवक्ता परिषद से पूछा
हाई कोर्ट में यह जनहित याचिका एडवोकेट निमेष पाठक ने दायर की है। याचिका पर गुरुवार को युगलपीठ ने सुनवाई की। याचिका में यह मांग भी की गई है कि शासन अधिव ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 05 Mar 2026 07:52:45 PM (IST)Updated Date: Thu, 05 Mar 2026 07:59:16 PM (IST)
इंदौर हाई कोर्ट।HighLights
- याचिका में यह मांग भी की गई है कि शासन अधिवक्ताओं के कल्याण के लिए नई योजना लाए।
- नियमों में बंधे होने की वजह से अधिवक्ता वकालात के अलावा कोई अन्य काम नहीं कर सकते।
- नए अधिवक्ताओं के सामने स्थापित करने की चुनौती होती है। प्रतिमाह स्टायपंड मिलना चाहिये।
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने शासन, बार कौंसिल ऑफ इंडिया और राज्य अधिवक्ता परिषद से पूछा है कि नए अधिवक्ताओं को स्टायपंड क्यों नहीं दिया जाता है। कोर्ट ने यह जवाब उस जनहित याचिका में मांगा है।
इसमें कहा है कि नए अधिवक्ताओं को अपनी प्रैक्टिस जमाने में तीन से पांच साल का समय लगता है। इस अवधि में उनके पास भरण पोषण का कोई अन्य साधन नहीं होता है, ऐसी स्थिति में नए अधिवक्ताओं को शासन द्वारा प्रारंभिक तीन वर्ष तक प्रतिमाह स्टायपंड दिया जाना चाहिए।
याचिका में जिला स्तर पर नए अधिवक्ताओं को बीस हजार रुपये प्रतिमाह और तहसील स्तर पर 15 हजार रुपये प्रतिमाह स्टायपंड दिए जाने की मांग की गई है। याचिका में मुख्यमंत्री अधिवक्ता कल्याण योजना के तहत नए अधिवक्ताओं को दिए जाने वाले 12 हजार रुपये का भुगतान नहीं होने का मुद्दा भी उठाया गया है।
हाई कोर्ट में यह जनहित याचिका एडवोकेट निमेष पाठक ने दायर की है। याचिका पर गुरुवार को युगलपीठ ने सुनवाई की। याचिका में यह मांग भी की गई है कि शासन अधिवक्ताओं के कल्याण के लिए नई योजना लाए।
कहा है कि नियमों में बंधे होने की वजह से अधिवक्ता वकालात के अलावा कोई अन्य काम नहीं कर सकते। नए अधिवक्ताओं के सामने खुद को स्थापित करने की चुनौती होती है। इसमें लंबा समय लगता है। ऐसे में नए अधिवक्ताओं को सनद प्राप्त करने के कम से कम तीन वर्ष तक एक निश्चित स्टायपंड देना चाहिए।
मुख्यमंत्री अधिवक्ता कल्याण योजना की राशि भी नहीं मिली
याचिका में मुख्यमंत्री अधिवक्ता कल्याण योजना की राशि नहीं मिलने का मुद्दा भी उठाया गया है। इस योजना के तहत नए अधिवक्ताओं को 12 हजार रुपये दिए जाते हैं, ताकि वे अपने लिए पुस्तकें, टेबल इत्यादि का इंतजाम कर सकें। याचिका में कहा है कि वर्ष 2019 से शासन ने यह राशि जारी नहीं की। प्रदेशभर में कम से कम 20 हजार नए अधिवक्ता इस राशि का इंतजार कर रहे हैं। मामले में अगली सुनवाई 23 मार्च से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी।