
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। देश में बुजुर्गों की बढ़ती आबादी के साथ उनकी सुरक्षा और देखभाल बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ‘क्राइम इन इंडिया-2024’ रिपोर्ट बताती है कि वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ अपराध के मामलों में एक वर्ष में 16.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
चिंताजनक तथ्य यह है कि मध्य प्रदेश लगातार तीसरे वर्ष ऐसे अपराधों में देश में पहले स्थान पर बना हुआ है।रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 में देशभर में 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के खिलाफ 31 हजार से अधिक अपराध दर्ज किए गए। इनमें अकेले मध्य प्रदेश में 5,875 मामले सामने आए, जो देश में सर्वाधिक हैं। महाराष्ट्र 4,918 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर रहा।
विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक ठगी, संपत्ति विवाद, चोरी, मारपीट और अकेले रह रहे बुजुर्गों को निशाना बनाने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। बदलती सामाजिक संरचना ने इस समस्या को और जटिल बनाया है। रोजगार और शिक्षा के लिए बच्चों के दूसरे शहरों या विदेशों में बस जाने से बड़ी संख्या में बुजुर्ग अकेले रह रहे हैं। ऐसे परिवारों में सुरक्षा के साथ-साथ नियमित देखभाल भी एक बड़ी जरूरत बन गई है।
इसी आवश्यकता को देखते हुए इंदौर में बुजुर्ग देखभाल के लिए विशेष प्रशिक्षण की शुरुआत की गई है। यहां औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आइटीआइ) में जेरियाट्रिक केयरगिवर पाठ्यक्रम शुरू हुआ है। जेरियाट्रिक केयरगिवर वह प्रशिक्षित व्यक्ति होता है जो वरिष्ठ नागरिकों की स्वास्थ्य, दवा, दैनिक गतिविधियों और भावनात्मक जरूरतों का ध्यान रखता है।
इस कोर्स में विद्यार्थियों को बुजुर्गों की शारीरिक, मानसिक और दैनिक जरूरतों की देखभाल का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण में दवा प्रबंधन, प्राथमिक उपचार, आपातकालीन सहायता, मानसिक सहयोग और उम्रजनित बीमारियों की समझ जैसे विषय शामिल हैं।
नीति आयोग की ‘सीनियर केयर रिफार्म्स इन इंडिया’ रिपोर्ट भी प्रशिक्षित जेरियाट्रिक केयरगिवर का बड़ा नेटवर्क तैयार करने की जरूरत पर जोर देती है। रिपोर्ट के अनुसार आने वाले वर्षों में वरिष्ठ नागरिकों की संख्या तेजी से बढ़ेगी और उनकी देखभाल के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन की मांग भी बढ़ेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि बुजुर्गों की सुरक्षा केवल पुलिसिंग का विषय नहीं है। समाज को ऐसी व्यवस्था भी विकसित करनी होगी, जिसमें वरिष्ठ नागरिक सुरक्षित होने के साथ सम्मानजनक और सक्रिय जीवन जी सकें। ऐसे में जेरियाट्रिक केयरगिवर जैसे नए पेशे भविष्य की महत्वपूर्ण सामाजिक आवश्यकता बनकर उभर रहे हैं।