
उदय प्रताप सिंह, नईदुनिया, इंदौर : हेपेटाइटिस के बारे में कई बार मरीजों को पता ही चलता। मरीज वायरस के साथ जीते है लेकिन जब वायरस का लोड बढ़ता है तो लिवर को नुकसान होता है। इस वजह से हेपेटाइटिस को साइलेंट किलर कहा जाता है। यदि जांच में समय पर हेपेटाइटिस का पता चल चल जाए और टीकाकरण व शुरुआती उपचार हो जाए तो इस इस बीमारी की जटिलाताओं को टाला जा सकता है।
इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज में हेपेटाइटिस के उपचार के लिए बनाए गए माडल ट्रीटमेंट सेंटर में ही हर साल हेपेटाइटिस बी के एक हजार व हेपेटाइटिस सी के 300 मरीजों की पहचान हो रही है। इनमें से करीब 50 फीसदी मरीजों को उपचार की जरुरत होती है। यहां पर इंदौर संभाग के सभी जिलों के हेपेटाइटिस के गंभीर मरीज पहुंचते है। हालांकि पीसी सेठी स्थित जिला हेपेटाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर में हेपेटाइटिस के मरीजों की जांच, पहचान व उपचार की सुविधा मिल रही है।
चिकित्सकों के मुताबिक जिन मरीजों में हेपेटाइटिस बी व सी की पुष्टि होती है। उन्हें निर्धारित अंतराल पर दवा लेने के साथ पुन: फॉलोअप के साथ टेस्ट करवाना चाहिए। उनमें वायरस के लोड का आंकलन किया जाता है। इसमें हर छह-छह माह में जांच की जाती है।
हेपेटाइटिस बी की बेस लाइन जांच और साल एक बार वायरल लोड टेस्ट एबीवी डीएनए किया जाता है। वही हेपेटाइटीस सी के मरीज के टेस्टम में पाजिटिव आने पर एचसीवी आरएनए किया जाता है। वायरल की संख्या निकलने पर इलाज शुरु होता है और 12 से 24 घंटे तक उपचार चलता है। तीन माह का ब्रेक कर फिर से एचबीवी वायरस टेस्ट किया जाता है।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिला जेल के कैदियों के लिए विशेष स्क्रीनिंग कैंप लगाया गया । इसमें पांच कैदी ऐसे मिले है जो रिहा हो गए है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग का अमला उन्हें खोजकर पुन: जांच करने का प्रयास कर रहा है।

इसमें सेक्स वर्कर, ट्रांसजेंडर, नशा करने वाले लोग, ट्रक डाइवर सहित अन्य लोग होते है। स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत टारगेटेड इंटरवेंशन एनजीओ को टीम इन केटेगरी के लोगों की पहचान कर उनकी हेपेटाइटिस जांच करती है। अप्रैल से जुलाई तक विगत तीन माह में 6500 की जांच की गई। इसमें से तीन से चार ही पाजिटिव मिले। राज्य सरकार द्वारा जल्द ही हाई रिस्क ग्रुप के लिए हेपेटाइटिस बी का टीका उपलब्ध करवाया जाएगा। इस ग्रुप के लोगों को यह टीका जल्द लगाया जाएगा।
लोगों में जागरुकता बढ़ने के कारण हेपेटाइटिस के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। यदि कोई व्यक्ति हेपेटाइटिस बी पॉजिटिव पाया जाता है तो उसके परिवार के सभी सदस्यों की हेपेटाइटिस की जांच की जाती है। टैटू लगवाने वाले, ट्रक ड्रायवर, पेथलॉजिस्ट, नर्स व डाक्टर जो चिकित्सकीय पेशे में होते है। उन्हें बचाव के लिए हेपेटाइटिस बी का टीका जरुर लगवाना चाहिए। -डॉ. प्रेशिता द्विवेदी, मेडिकल ऑफिसर, नेशनल वायरल हेपेटिसाइटिस कंट्रोल सेंटर, एमजीएम मेडिकल कॉलेज