
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। बाघ स्टेट का दर्जा प्राप्त मध्यप्रदेश में जिस तरह से बाघों की संख्या बढ़ रही है, वहीं आपसी संघर्ष व अन्य कारणों से उनकी मौतें भी हो रही हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले पांच वर्षों में 147 बाघ-बाघिन और शावकों की मौत हो चुकी है। इनमें सर्वाधिक 82 मौतों का कारण बाघ-बाघिनों के बीच आपसी संघर्ष बताया जा रहा है। वहीं दूसरा कारण प्रदेश में बाघों की सुरक्षा, संरक्षण, देखभाल और उनके इलाज के लिए अब तक स्पेशल फोर्स का गठन न किया जाना भी है।
बाघों की मौत का मामला मप्र विधानसभा में उठा
दरअसल बाघों की मौत का मामला मप्र विधानसभा में उठा है। जबलपुर के पूर्व विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ने इस संबंध में सवाल लगाया था। जिसके लिखित जवाब में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी स्वीकार किया कि प्रदेश में बाघों के संरक्षण, देखभाल, इलाज तथा बाघों की सुरक्षा के लिए स्पेशल फोर्स का गठन नहीं किया गया है। हालांकि यह भी स्पष्ट किया कि प्रदेश में बाघों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सुरक्षित कारिडोर बनाए जाएंगे। राष्ट्रीय व्याघ्र संरक्षण प्राधिकरण, नई दिल्ली द्वारा मध्यप्रदेश में सात वाइल्ड लाइफ कारिडोर चिन्हांकित किए गए हैं। मध्यप्रदेश के 20 वर्षीय वाइल्ड लाइफ एक्शन प्लान में 21 वाइल्ड लाइफ कारिडोर चिन्हांकित किए गए हैं।
बाघों की संख्या में 49 प्रतिशत की वृद्धि
सवाल के लिखित जवाब में मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2018 की बाघ गणना अनुसार 526 बाघ-बाघिन थे। वर्ष 2022 की बाघ गणना के अनुसार प्रदेश में 785 बाघ-बाघिन हो गए। इस तरह बाघों की संख्या में 49 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। हालांकि बढ़ती आबादी के हिसाब से छोटे पड़ते जंगलों के कारण वर्ष 2021 से 2025-26 तक 147 बाघ-बाघिन और शावकों की मौतें भी हुई हैं।
किस वर्ष हुई कितनी मौतें
वर्ष - संख्या
2021 - 27
2022 - 27
2023 - 32
2024 - 29
2025 - 32
मौत की वजह
स्वाभाविक, प्राकृतिक - 44
आपसी संघर्ष - 82
शिकार, फंदा - 16
अन्य - 05
नौ टाइगर रिजर्व हैं प्रदेश में
मध्यप्रदेश में नौ टाइगर रिजर्व हैं, जिसमें कान्हा किसली, बांधवगढ़, पेंच, पन्ना बुंदेलखंड, सतपुड़ा नर्मदापुरम, संजय दुबरी सीधी, नौरादेही, माधव नेशनल पार्क और डॉ. विष्णु वाकणकर टाइगर रिजर्व (रातापानी) शामिल हैं। मध्यप्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में सबसे अधिक बाघ हैं। यह रिजर्व मध्यप्रदेश का सबसे प्रसिद्ध टाइगर रिजर्व है। वन्य जीव पर्यटन में मध्यप्रदेश विशेष आकर्षण का केंद्र बनकर उभरा है।
देशी और विदेशी पर्यटकों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी
टाइगर रिजर्व में देशी और विदेशी पर्यटकों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पांच वर्षों में भारतीय पर्यटकों की संख्या 7 लाख 38 हजार से ज्यादा और विदेशी पर्यटकों की संख्या 85 हजार 700 से अधिक रही। वहीं पांच वर्षों में टाइगर रिजर्व को 61 करोड़ 22 लाख रुपये की आय भी हुई है।
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