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केवल शक के आधार पर किसी महिला को उसके बच्‍चे से मिलने से नहीं रोका जा सकता, एमपी हाईकोर्ट ने एक सुनवाई में दी व्‍यवस्‍था

अंतरिम आदेश में साफ किया कि महज संदेह के आधार पर किसी महिला को उसके बच्चे से मिलने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।

By Surendra DubeyEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Mon, 20 Jul 2026 11:29:25 PM (IST)Updated Date: Mon, 20 Jul 2026 11:34:37 PM (IST)
केवल शक के आधार पर किसी महिला को उसके बच्‍चे से मिलने से नहीं रोका जा सकता, एमपी हाईकोर्ट ने एक सुनवाई में दी व्‍यवस्‍था
मध्‍य प्रदेश हाई कोर्ट की सुनवाई का एआई फोटो।

HighLights

  1. मातृत्व पर संदेह तो पहले करें जांच, मप्र हाई कोर्ट।
  2. जन्म प्रमाणपत्र, रिकार्ड का सत्यापन कर जवाब दें।
  3. 24 जुलाई तक रोज दो घंटे मुलाकात की अनुमति।

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ ने अपने एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश में साफ किया कि महज संदेह के आधार पर किसी महिला को उसके बच्चे से मिलने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।

यदि मातृत्व पर शंका है तो संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन कर तथ्य सामने लाए जाएं। कोर्ट ने दमोह निवासी रीना की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य शासन को जन्म प्रमाणपत्र और अस्पताल के रिकार्ड का सत्यापन कर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।


साथ ही अंतरिम राहत देते हुए याचिकाकर्ता को अगली सुनवाई तक प्रतिदिन सुबह 11 से दोपहर एक बजे तक बच्चे से मिलने की अनुमति प्रदान की है।

यह है पूरा मामला

  • याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अभिनव दुबे ने पक्ष रखा।
  • उन्होंने बताया कि याचिका के साथ बच्चे का जन्म प्रमाणपत्र तथा जिला अस्पताल, दमोह की डिस्चार्ज टिकट प्रस्तुत की गई है, जिससे स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता ने ही बच्चे को जन्म दिया।
  • इसके विपरीत संबंधित प्राधिकारी ने मातृत्व पर संदेह जताते हुए कहा कि अभिलेख पर्याप्त नहीं हैं।
  • राज्य की ओर से शासकीय अधिवक्ता प्रभांशु शुक्ला ने कोर्ट को बताया कि इस संबंध में विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के लिए समय चाहिए।

    इस पर अदालत ने तीन दिन का समय देते हुए निर्देश दिया कि सभी दस्तावेजों का सत्यापन कर तथ्यात्मक जवाब प्रस्तुत किया जाए।

सुरक्षा के बीच होगी मुलाकात

हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता की बच्चे से मुलाकात महिला थाना, सागर के एक पुलिसकर्मी की उपस्थिति में कराई जाएगी। पुलिस अधीक्षक, सागर को आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा पुलिस अधीक्षक, दमोह को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी को हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 24 जुलाई को होगी। तब तक अंतरिम व्यवस्था प्रभावी रहेगी।