
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर: शहर की यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए सोमवार को दीनदयाल चौक पर परिवहन विभाग ने बड़ी कार्रवाई की। लोकल अवकाश होने के बावजूद प्रशासन की संयुक्त टीम ने औचक दबिश देकर सड़क पर खड़ी कर सवारी भरने वाली बसों पर कार्रवाई की। इस दौरान नियमों का उल्लंघन करने वाली आठ बसों को जब्त कर लिया गया।
प्रशासन को लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि बस स्टैंड से आने-जाने वाली बसें दीनदयाल चौक के पास मुख्य सड़क पर ही रुक जाती हैं। निर्धारित स्टॉप न होने के बावजूद ड्राइवर बीच सड़क पर बसें खड़ी कर सवारी उतारते और बैठाते थे। इससे क्षेत्र में लगातार जाम की स्थिति बनी रहती थी और आम लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता था।
कलेक्टर के निर्देश पर गरूड़ दल, नगर निगम, पुलिस और आरटीओ की संयुक्त टीम ने यह कार्रवाई की। इस अभियान में अनुविभागीय दंडाधिकारी अधारताल, उप पुलिस अधीक्षक (यातायात), आरटीओ और नगर निगम की अतिक्रमण शाखा के अधिकारी शामिल रहे। टीम ने मौके पर पहुंचकर यातायात में बाधा उत्पन्न करने वाली बसों को जब्त किया।
कार्रवाई के दौरान जिन बसों को जब्त किया गया, उनके नंबर हैं— एमपी20 जेडएफ 9111, एमपी20 जेडडब्ल्यू 1917, एमपी 20 पीए 1628, एमपी04 पीए 2863, एमपी 20 जेडएच 9500, एमपी34 पी 4205 और एमपी 17 जेडएफ 9902। इनमें से एमपी 20 जेडएच 9500 को बारात परमिट होने के कारण छोड़ दिया गया, जबकि एमपी 17 जेडएफ 9902 पर 10 हजार रुपये का चालान काटकर छोड़ा गया।
अचानक हुई इस कार्रवाई के कारण बसों में सवार यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई महिलाएं और बच्चे धूप में परेशान होते नजर आए। बसों के जब्त होने के बाद यात्री भी परिवहन कार्यालय पहुंच गए और नाराजगी जताई। स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब यात्रियों ने हंगामा शुरू कर दिया।
परिवहन विभाग ने केवल दीनदयाल चौक ही नहीं, बल्कि शाम के समय बल्देवबाग और करमेता क्षेत्रों में भी सवारी बसों के खिलाफ अभियान चलाया। यहां भी नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर कार्रवाई की गई।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भविष्य में भी इस तरह की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। बस संचालकों और ड्राइवरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे केवल निर्धारित स्टॉप पर ही बस रोकें। सड़क पर अवैध रूप से वाहन खड़ा कर जाम की स्थिति बनाने पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
कार्रवाई के बाद बस संचालक अपने वाहन छुड़ाने के लिए कागजात लेकर परिवहन कार्यालय पहुंचे, लेकिन तत्काल राहत नहीं मिली। कई जनप्रतिनिधियों ने भी हस्तक्षेप करने का प्रयास किया, फिर भी कुछ बसों को शाम तक ही छोड़ा गया। कुछ संचालक कलेक्टर से मिलने पहुंचे, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी।