
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (रादुवि) में वर्ष 1999-2000 के पुनर्मूल्यांकन में कथित धांधली के मामले में करीब 23 साल बाद बड़ी कार्रवाई हुई है। तत्कालीन एसएम सिंह कमेटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर दर्ज एफआइआर में सीआइडी ने पांच आरोपियों के खिलाफ गत दिनों न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया है।
विश्वविद्यालय के तत्कालीन सहायक प्राध्यापक, प्रोफेसर और लिपिक शामिल हैं। वहीं, तत्कालीन सहायक कुलसचिव यशवंत पटेल के विरुद्ध अभी जांच प्रक्रिया में है। पटेल वर्तमान में छतरपुर स्थित महाराजा छत्रसाल विश्वविद्यालय में प्रभारी कुलसचिव हैं।
मामले की शुरुआत उस समय हुई, जब कुछ छात्रों ने कुलपति से शिकायत की कि वर्ष 1999-2000 में पुनर्मूल्यांकन के दौरान कथित तौर पर मनमाने तरीके से अंक बढ़ाकर अनुत्तीर्ण छात्रों को उत्तीर्ण किया गया। शिकायत की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसएम सिंह कमेटी गठित की गई।
जांच में उत्तरपुस्तिकाओं का कई बार मूल्यांकन कर अंक बढ़ाने, अनुचित तरीके से अधिक अंक देने, टेबुलेशन शीट में हेराफेरी कर गलत अंकसूचियां जारी करने और परीक्षा अभिलेखों में काट-छांट जैसी गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।
जांच रिपोर्ट के आधार पर विश्वविद्यालय ने संबंधित परीक्षा परिणाम निरस्त करने और पुनर्मूल्यांकन की अंकसूचियां जमा कराने के आदेश दिए। तत्कालीन कुलसचिव की रिपोर्ट पर सिविल लाइंस थाना में धोखाधड़ी और दस्तावेजों में कूटरचना सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया। बाद में हाईकोर्ट के आदेश पर जांच सीआइडी को सौंपी गई।
सीआईडी ने छानबीन में 13 आरोपियों के विरुद्ध अपराध करना सिद्ध पाया गया। इनमें से सात की मृत्यु हो चुकी है। मृत आरोपियों में तत्कालीन प्रोफेसर आरके रजक, विनोद कुमार पांडे, डाॅ. विष्णु मित्र त्रिपाठी, डाॅ. एसएन मिश्रा, डाॅ. बीके साहू, और विजय रैकवार व अंबिका प्रसाद गुप्ता शामिल हैं।
शेष छह में पांच के खिलाफ न्यायालय में चालान पेश किया गया है। इन में बायोसाइंस विभाग के तत्कालीन असिस्टमेंट डाॅ. प्रदीप कुमार सिंघल (अब सेवानिवृत्त), प्रो ए शर्मा (अब सेवानिवृत्त), डाॅ. वायके बंसल (अब सेवानिवृत्त), अशोक कुमार श्रीवास्तव और एक अन्य शामिल हैं। सभी के नाम मामले में आरोपी के रूप में सामने आए हैं। मामले में छठे आरोपी यशवंत पटेल हैं, के विरुद्ध छानबीन और चार्जशीट की प्रक्रिया जारी है।
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