बिना परामर्श एंटीबायोटिक्स लेना खतरनाक, जबलपुर में डॉक्टरों ने छात्रों को किया जागरूक
जबलपुर के पीएमश्री शासकीय महाकोशल कला एवं वाणिज्य स्वशासी महाविद्यालय में एंटीबायोटिक्स के दुरुपयोग पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित हुआ। सीएमएचओ डॉ. संजय ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 12 Feb 2026 06:44:05 AM (IST)Updated Date: Thu, 12 Feb 2026 07:16:32 AM (IST)
OTC दवाओं से बढ़ रहा रेजिस्टेंस, विशेषज्ञों ने दी पूरी कोर्स लेने की सलाह (AI Generated Image)HighLights
- विद्यार्थियों को दिया स्वास्थ्य जागरूकता संदेश
- रेजिस्टेंस पावर बढ़ने से दवा बेअसर
- ओटीसी दवाओं से सेहत को नुकसान
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर: जबलपुर में एंटीबायोटिक्स के बढ़ते दुरुपयोग को लेकर नईदुनिया के अभियान के तहत एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। पीएमश्री शासकीय महाकोशल कला एवं वाणिज्य स्वशासी महाविद्यालय के सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को बिना चिकित्सकीय सलाह दवा लेने के खतरों से अवगत कराया। वक्ताओं ने बताया कि अधूरा इलाज और ओटीसी दवाओं का प्रयोग भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।
डॉक्टर से परामर्श जरूरी : डा. संजय मिश्रा
सीएमएचओ डॉ. संजय मिश्रा ने कहा कि आजकल बुखार या सर्दी होने पर लोग सीधे दवा दुकान से गोली लेकर इलाज कर लेते हैं, जबकि पहले डॉक्टर से जांच कराना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चिकित्सक द्वारा लिखी गई दवा का पूरा कोर्स करना चाहिए। बीच में दवा बंद करने से बीमारी दोबारा उभर सकती है और शरीर में दवा के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है।
उन्होंने बताया कि कई मरीज सर्दी-खांसी में ओटीसी दवा लेने के बाद आराम न मिलने की शिकायत करते हैं। इसका कारण शरीर में रेजिस्टेंस पावर का बढ़ना है, जिससे दवा असर करना बंद कर देती है।
एंटीबायोटिक्स का अधिक सेवन हानिकारक : डा. आदित्य परिहार
एमडी मेडिसिन डॉ. आदित्य परिहार ने विद्यार्थियों को बताया कि एंटीबायोटिक्स का अनुचित उपयोग शरीर के लिए नुकसानदेह है। ये केवल हानिकारक बैक्टीरिया ही नहीं, बल्कि पाचन तंत्र के लाभकारी बैक्टीरिया को भी नष्ट कर देते हैं, जिससे दस्त और पेट दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि वायरल संक्रमण में बिना जांच हाई डोज दवा लेना खतरनाक हो सकता है। विशेषज्ञ जांच के बाद ही दवा की उचित मात्रा तय करते हैं, ताकि मरीज को लाभ हो और आंतरिक क्षति न पहुंचे।