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नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। Jabalpur boat accident। बरगी डैम में हुए क्रूज हादसे ने लापरवाही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मौसम विभाग द्वारा पहले ही तेज हवाओं को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया था, इसके बावजूद नर्मदा नदी में क्रूज संचालन जारी रखा गया। मेकल रिसॉर्ट, बरगी के सीसीटीवी फुटेज में 43 पर्यटक क्रूज पर सवार होते नजर आए हैं। आशंका जताई जा रही है कि कुछ पर्यटकों ने बिना टिकट ही यात्रा की।
सूत्रों के मुताबिक, भारत मौसम विज्ञान विभाग ने जबलपुर क्षेत्र में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी थी। इसके बावजूद पर्यटकों से भरे क्रूज को नर्मदा के बैकवाटर क्षेत्र में चलने की अनुमति दी गई। क्रूज जब नदी के गहरे हिस्से में पहुंचा, तभी अचानक मौसम ने करवट ली और तेज हवाएं चलने लगीं, जिससे स्थिति बिगड़ गई।
बरगी क्रूज हादसे में मप्र पर्यटन निगम की लापरवाही भी सामने आ रही है। 80 क्षमता वाले क्रूज में 42 पर्यटक सवार हुए। मौसम का प्री-अलर्ट होने के बाद भी अनदेखी की गई। शुरुआती जांच में पता चला है कि वाटर स्पोर्ट्स से जुड़े कर्मियों को प्री-अलर्ट मिला ही नहीं। वे सिर्फ लहरों और अनुभव के आधार पर ही मौसम का आकलन करते हैं।
जबलपुर के Bargi Dam में हादसा, क्रूज पलटने से 4 लोगों की मौत, 15 की बचाई गई जान; रेस्क्यू ऑपरेशन जारी pic.twitter.com/HmjPo5gS2M
— NaiDunia (@Nai_Dunia) April 30, 2026
अफसरों का कहना है कि मौसम की स्थिति मोबाइल पर भी देखी जाती है, जबकि हादसे में बचे कई पर्यटकों ने बताया कि खराब मौसम और तेज हवाओं को देखकर उन्होंने क्रूज को वापस ले जाने का दबाव बनाया था। इसी बीच तेज बवंडर ने क्रूज को अपनी चपेट में ले लिया। मप्र पर्यटन निगम का क्रूज गुरुवार शाम मेकल रिसॉर्ट से पर्यटकों को लेकर निकला था, लेकिन सुरक्षा इंतजामों में भारी लापरवाही सामने आई। सबसे बड़ी चूक यह रही कि यात्रियों को लाइफ जैकेट नहीं पहनाई गई।
इंटरनेट मीडिया पर सामने आए वीडियो में भी अधिकांश पर्यटक बिना लाइफ जैकेट के नजर आए। हादसे के दौरान जिन यात्रियों ने लाइफ जैकेट पहनी थी, वे अपनी जान बचाने में सफल रहे। इसके अलावा नियम के मुताबिक 10-15 पर्यटकों पर एक लाइफ सेवर होना चाहिए, लेकिन यहां इसका पालन नहीं हुआ। क्रूज में कैप्टन महेश के अलावा केवल एक कर्मचारी छोटू मौजूद था। यानी 42 पर्यटकों के लिए सिर्फ दो स्टाफ ही थे, जो पर्याप्त नहीं थे।
जांच में यह भी सामने आया है कि मौसम विभाग के प्री-अलर्ट पर ध्यान नहीं दिया गया। स्टाफ ने अपने अनुभव और मोबाइल पर उपलब्ध मौसम रिपोर्ट के आधार पर ही निर्णय लिया। नियमों के अनुसार खराब मौसम की स्थिति में क्रूज संचालन रोक दिया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
मप्र पर्यटन निगम में जल क्रीड़ा सलाहकार राजेंद्र निगम ने लापरवाही के आरोपों पर कहा कि क्रूज 20 साल पुराना जरूर था, लेकिन पूरी तरह सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल था। उन्होंने बताया कि एफआरपी कंपनी के इस क्रूज की आयु 50 वर्ष तक होती है। क्रूज में 80 लाइफ जैकेट मौजूद थीं। आमतौर पर क्रूज या बड़े जहाजों में पर्यटक यात्रा के दौरान लाइफ जैकेट नहीं पहनते, बल्कि जरूरत पड़ने पर ही उपयोग करते हैं।
जल क्रीड़ा सलाहकार बोले मौसम को लेकर उन्होंने कहा कि कई बार अचानक मौसम खराब हो जाता है और इस बार भी ऐसा ही हुआ। उनके अनुसार स्टाफ मोबाइल पर मौसम की जानकारी देखता है और उसी आधार पर निर्णय लिया जाता है। क्रूज कैप्टन के पास 10 वर्षों का अनुभव था और वह नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वाटर स्पोर्ट्स से प्रशिक्षित था। सहयोगी स्टाफ भी प्रशिक्षित था।
राजेंद्र निगम ने कहा कि क्रूज में तीन स्टाफ थे, लेकिन एक कर्मचारी जेटी (जहां क्रूज खड़ा होता है) पर ही रह गया था। क्रूज हवाओं की गति 50-60 किलोमीटर प्रति घंटा थी, जबकि क्रूज सामान्यतः 30 किलोमीटर प्रति घंटे तक की हवाओं को सहन कर सकता है।
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