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मौत के बाद भी लाॅग-इन नहीं हो पाई संपत्ति, जबलपुर में डिजिटल विरासत ने खोली कानून की नई खिड़की

अब विरासत का नया दस्तावेज केवल वसीयत नहीं, डिजिटल संपत्ति का सुरक्षित नक्शा भी है। वरना जीवनभर की कमाई खाते में दर्ज रहेगी और वारिस उसके दरवाजे पर खड़...और पढ़ें

By Surendra DubeyEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Sat, 10 Oct 2026 10:05:36 PM (IST)Updated Date: Sat, 10 Oct 2026 10:05:36 PM (IST)
मौत के बाद भी लाॅग-इन नहीं हो पाई संपत्ति, जबलपुर में डिजिटल विरासत ने खोली कानून की नई खिड़की

HighLights

  1. शेयर, क्रिप्टो और ऑनलाइन कमाई से आगे बढ़ा उत्तराधिकार का सवाल
  2. जिलों में अदालतों के सामने संपत्ति के साथ निजता और पहुंच की चुनौती
  3. उत्तराधिकार की पारंपरिक अवधारणाओं के सामने डिजिटल रिकाॅर्ड महत्वपूर्ण

सुरेन्द्र दुबे, नईदुनिया, जबलपुर। संपत्ति की विरासत अब केवल जमीन के दस्तावेजों, बैंक खातों और तिजोरी की चाबियों में बंद नहीं है। उसका एक बड़ा हिस्सा ऐसी डिजिटल दुनिया में पहुंच गया है, जहां संपत्ति मौजूद है, उसका मूल्य भी है, लेकिन मालिक के जाने के बाद परिवार के लिए उस तक पहुंचना असंभव हो सकता है। सवाल अब सिर्फ यह नहीं कि वारिस कौन है, बल्कि यह भी है कि वारिस अपनी संपत्ति तक पहुंचेगा कैसे।

अदालत तक पहुंचा डिजिटल जीवन

पांच मई 2026 को गांधीनगर की एक सिविल अदालत ने मृत व्यक्ति के आईक्लाउड खाते और उसमें सुरक्षित तस्वीरों, वीडियो तथा अन्य डिजिटल सामग्री तक पहुंच के लिए उसकी बेटी को प्रशासनिक अधिकार प्रदान किए। यह घटनाक्रम बताता है कि उत्तराधिकार की पारंपरिक अवधारणाओं के सामने अब डिजिटल रिकाॅर्ड भी महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न बनकर उभर रहे हैं।


कानून है, लेकिन पूरा समाधान नहीं

अधिवक्ता मोहनलाल शर्मा के अनुसार भारतीय उत्तराधिकार कानूनों में डिजिटल संपत्तियों के लिए अभी व्यापक, एकीकृत व्यवस्था नहीं है। मौजूदा उत्तराधिकार सिद्धांतों के तहत डिजिटल संपत्तियों पर दावे संभव हो सकते हैं, लेकिन प्रत्येक खाते का हस्तांतरण संबंधित कानून, संपत्ति के स्वरूप और सेवा प्रदाता की शर्तों पर निर्भर कर सकता है। क्रिप्टो संपत्ति में कानूनी हक होने के बावजूद निजी कुंजी न मिलना अलग बाधा है।

डिजिटल विरासत का बदलता दायरा

  • संपत्ति का स्वरूप : उत्तराधिकार की चुनौती
  • डीमैट और म्यूचुअल फंड : नामांकन, दस्तावेज और हस्तांतरण
  • क्रिप्टो करेंसी : निजी कुंजी, रिकवरी वाक्यांश और प्लेटफार्म की प्रक्रिया
  • डिजिटल गोल्ड व ई-वालेट : निवेश का रिकाॅर्ड और दावा
  • यूट्यूब, ब्लाग व सोशल मीडिया : खाते का नियंत्रण और लंबित कमाई
  • क्लाउड, ई-मेल व डिजिटल रिकाॅर्ड : पहचान, निजता और अधिकृत पहुंच
  • वेबसाइट व डोमेन : स्वामित्व, नवीनीकरण और आय का हस्तांतरण

नामांकन का अर्थ अंतिम मालिक होना नहीं

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के 2025 के दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि डीमैट और म्यूचुअल फंड संपत्तियों का नामित व्यक्ति सामान्यतः कानूनी वारिसों की ओर से न्यासी की भूमिका में संपत्ति प्राप्त करता है। यानी नामांकन हस्तांतरण आसान बना सकता है, लेकिन उससे उत्तराधिकार के अंतिम अधिकार अपने आप तय नहीं हो जाते।

समाधान संपत्ति की डिजिटल सूची

अधिवक्ता संदीप जैन के अनुसार वसीयत में प्रत्येक डिजिटल संपत्ति की पहचान, संबंधित संस्था, खाते का विवरण और उत्तराधिकार संबंधी निर्देश दर्ज होने चाहिए। पासवर्ड या क्रिप्टो की निजी कुंजी सीधे वसीयत में लिखने के बजाय सुरक्षित माध्यम में रखकर विश्वस्त व्यक्ति को आपातकालीन पहुंच की व्यवस्था देना अधिक विवेकपूर्ण है।

निवेशों की सूची नियमित रूप से संशोधित करें

नामांकन अद्यतन रखें और ऑनलाइन आय, क्लाउड रिकार्ड तथा निवेशों की सूची नियमित रूप से संशोधित करें। अब विरासत का नया दस्तावेज केवल वसीयत नहीं, डिजिटल संपत्ति का सुरक्षित नक्शा भी है। वरना जीवनभर की कमाई खाते में दर्ज रहेगी और वारिस उसके दरवाजे पर खड़ा होकर भी प्रवेश नहीं पा सकेगा।

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