• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • कोरोना वायरस
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • रक्षाबंधन
  • सावन माह
  • मानसून
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • वास्‍तु शास्‍त्र
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • जबलपुर

बिना सुनवाई सरकारी अनुबंध रद करना मनमानी, हाई कोर्ट ने वर्क आर्डर किया बहाल

टेंडर प्रक्रिया में दो बोलीदाता पात्र पाए गए और दोनों की दर समान होने पर ड्रॉ ऑफ लॉट्स से अपीलकर्ता कंपनी का चयन किया गया।

By Surendra DubeyEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Tue, 18 Aug 2026 03:10:12 PM (IST)Updated Date: Tue, 18 Aug 2026 03:10:12 PM (IST)
बिना सुनवाई सरकारी अनुबंध रद करना मनमानी, हाई कोर्ट ने वर्क आर्डर किया बहाल
यह कार्रवाई बिना शो-कॉज नोटिस और सुनवाई के की गई।

HighLights

  1. एक दिन की देरी को नहीं माना अनुबंध खत्म करने का आधार
  2. याचिकाकर्ता को 10 हजार रुपये लागत देने के निर्देश दिए हैं
  3. न्‍याय देने से पहले प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन जरूरी

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि निष्पादित सरकारी अनुबंध को बिना कारण बताओ नोटिस और सुनवाई का अवसर दिए एकतरफा रद नहीं किया जा सकता।

वर्क आर्डर और अनुबंध बहाल कर दिया

कोर्ट ने टीकमगढ़ के सब हेल्थ सेंटरों में हाउसकीपिंग सेवाओं से जुड़े अनुबंध को रद्द करने का आदेश निरस्त करते हुए वर्क आर्डर और अनुबंध बहाल कर दिया। साथ ही राज्य के संबंधित अधिकारियों को याचिकाकर्ता को 10 हजार रुपये लागत देने के निर्देश दिए हैं।

युगलपीठ ने रिट अपील पर सुनावाई

एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया एवं जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने यह आदेश स्काईबुल सिक्योरिटी सर्विस ओपीसी प्राइवेट लिमिटेड की रिट अपील पर सुनाया। अपीलकर्ता की ओर से अधिवक्ता अमित कुमार सिंह सेंगर ने पक्ष रखा।

हाउसकीपिंग सेवाओं के लिए जारी टेंडर

मामला टीकमगढ़ जिले के सब हेल्थ सेंटरों में हाउसकीपिंग सेवाओं के लिए जारी टेंडर का है। टेंडर प्रक्रिया में दो बोलीदाता पात्र पाए गए और दोनों की दर समान होने पर ड्रॉ ऑफ लॉट्स से अपीलकर्ता कंपनी का चयन किया गया। 11 फरवरी 2026 को वर्क ऑर्डर जारी हुआ और 12 फरवरी को औपचारिक अनुबंध निष्पादित किया गया।


अधिकारियों ने उस पर कोई निर्णय नहीं लिया

कंपनी को सात दिन में परफॉर्मेंस बैंक गारंटी जमा करनी थी। कंपनी का कहना था कि बैंकिंग पोर्टल में तकनीकी समस्या के कारण वह समय पर गारंटी जमा नहीं कर सकी। उसने 14 फरवरी को आठ दिन की मोहलत मांगते हुए अभ्यावेदन दिया, लेकिन अधिकारियों ने उस पर कोई निर्णय नहीं लिया। इसके बाद 20 फरवरी को वर्क ऑर्डर और अनुबंध समाप्त कर दिया गया। यह कार्रवाई बिना शो-कॉज नोटिस और सुनवाई के की गई।

प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन जरूरी

हाईकोर्ट ने कहा कि कंपनी ने एक दिन की देरी के बाद बैंक गारंटी जमा की थी और देरी ऐसी प्रकृति की नहीं थी, जो पूरे अनुबंध को समाप्त करने का आधार बने। सक्षम प्राधिकारी को विलंब माफ करने की शक्ति थी और कंपनी के अभ्यावेदन पर विचार किया जाना चाहिए था। कोर्ट ने यह भी कहा कि निष्पादित अनुबंध को रद्द करने से पहले प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन जरूरी था।

20 फरवरी का समाप्ति आदेश निरस्त

युगलपीठ ने एकलपीठ का 6 जुलाई 2026 का आदेश तथा 20 फरवरी का समाप्ति आदेश निरस्त करते हुए 11 फरवरी का वर्क ऑर्डर और 12 फरवरी का अनुबंध बहाल कर दिया। रिट अपील 10 हजार रुपये लागत के साथ मंजूर की गई।

यह भी पढ़ें- जबलपुर में ऑनलाइन साड़ी खरीदी, अतिरिक्त रुपये मांगने पर ऑर्डर कैंसिल कराया तो 11 बार में 97 हजार रुपये ठगे