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ताप विद्युत घरों में कोयले का संकट गहराया, जबलपुर में रबी सीजन पर बिजली आपूर्ति का असर

बिजली मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदेश में इस समय ताप विद्युत घरों में उपलब्ध कोयला स्टॉक पिछले वर्ष की तुलना में आधे से भी कम रह गया है, जबक...और पढ़ें

By Pankaj TiwariEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Tue, 04 Aug 2026 09:13:54 AM (IST)Updated Date: Tue, 04 Aug 2026 09:13:54 AM (IST)
ताप विद्युत घरों में कोयले का संकट गहराया, जबलपुर में रबी सीजन पर बिजली आपूर्ति का असर
आरोप है कि इस बार पर्याप्त कोयला भंडारण नहीं किया गया, जो प्रबंधन की लापरवाही को दर्शाता है। सौजन्‍य सोशल मीडिया

HighLights

  1. पिछले साल की तुलना में आधे से भी कम स्टॉक
  2. प्रदेश के बिजलीघरों में सिंगाजी संयंत्र 'क्रिटिकल' श्रेणी में
  3. उपलब्ध कोयला स्टॉक पिछले वर्ष की तुलना में आधे से भी कम

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के ताप विद्युत घरों में कोयले का भंडार तेजी से घटने से आगामी रबी सीजन में बिजली उत्पादन और आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

बिजली मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि ...

प्रदेश में इस समय ताप विद्युत घरों में उपलब्ध कोयला स्टॉक पिछले वर्ष की तुलना में आधे से भी कम रह गया है।

लगातार बढ़ रही है बिजली की मांग

ऐसे में यदि समय रहते कोयले की आपूर्ति नहीं बढ़ाई गई तो रबी सीजन में बिजली संकट गहरा सकता है। बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है।

अल्प वर्षा के कारण जल विद्युत उत्पादन भी प्रभावित

विद्युत मामलों के विशेषज्ञ एवं मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के सेवानिवृत्त अतिरिक्त मुख्य अभियंता राजेंद्र अग्रवाल के अनुसार, इस वर्ष अल्प वर्षा के कारण जल विद्युत उत्पादन भी प्रभावित हुआ है।

ताप विद्युत घरों में कोयले के घटते भंडार ने चिंता और बढ़ा दी

पिछले वर्ष की तुलना में इस बार जल विद्युत उत्पादन केवल एक चौथाई रह गया है, जबकि बिजली की मांग करीब 30 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है। ऐसे समय में ताप विद्युत घरों में कोयले के घटते भंडार ने चिंता और बढ़ा दी है।

इस वर्ष घटकर केवल 4.92 लाख मीट्रिक टन रह गया

राजेंद्र अग्रवाल ने बताया कि जुलाई 2025 के अंत में प्रदेश के ताप विद्युत घरों में 11.27 लाख मीट्रिक टन कोयला उपलब्ध था, जबकि इस वर्ष यह घटकर केवल 4.92 लाख मीट्रिक टन रह गया है।

प्रतिदिन करीब 61,900 मीट्रिक टन कोयले की खपत

यह भारत सरकार के केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) के निर्धारित मानकों का केवल 37 प्रतिशत है। प्रदेश में प्रतिदिन करीब 61,900 मीट्रिक टन कोयले की खपत होती है।

इस संयंत्र में केवल 4.5 दिन का कोयला शेष

विशेषज्ञों के अनुसार, प्रदेश के सबसे बड़े ताप विद्युत गृह सिंगाजी (खंडवा) में स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है। 2,520 मेगावाट क्षमता वाले इस संयंत्र में केवल 4.5 दिन का कोयला शेष है।

रेलवे रेक की संख्या बढ़ाकर कोयले आपूर्ति तेज करें

केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने इसे क्रिटिकल (संकटपूर्ण) श्रेणी में रखते हुए रेलवे रेक की संख्या बढ़ाकर कोयले की आपूर्ति तेज करने की आवश्यकता जताई है।

विद्युत मामलों के विशेषज्ञ एवं मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के सेवानिवृत्त अतिरिक्त मुख्य अभियंता राजेंद्र अग्रवाल का कहना है कि हर वर्ष मानसून शुरू होने से पहले ताप विद्युत घरों में पर्याप्त कोयला भंडारण किया जाता रहा है, ताकि बारिश के दौरान खदानों में जलभराव या परिवहन संबंधी बाधाओं का असर बिजली उत्पादन पर न पड़े। उनका आरोप है कि इस बार पर्याप्त कोयला भंडारण नहीं किया गया, जो प्रबंधन की लापरवाही को दर्शाता है।


आपूर्ति व्यवस्था मजबूत करने की मांग की

उन्होंने प्रदेश सरकार से रबी सीजन के दौरान निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए युद्धस्तर पर कोयले का भंडार बढ़ाने और आपूर्ति व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।

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