
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर: जिले के नए मास्टर प्लान को लेकर शहर में चर्चाएं तेज हो गई हैं। आम लोग जहां इसके लागू होने का इंतजार कर रहे हैं, वहीं सबसे ज्यादा चिंता उन लोगों को है जो बिना मास्टर प्लान और नियमों के कृषि भूमि पर व्यावसायिक गतिविधियां चला रहे हैं।
शहर के बाइपास से लगी करीब 90 प्रतिशत जमीन टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएंडसीपी) के रिकार्ड में आज भी कृषि भूमि के रूप में दर्ज है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग दिखाई देती है। यहां तेजी से बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भेड़ाघाट रोड के अंधमूक चौराहा, पाटन-कटंगी चौराहा, महाराजपुर से पनागर बाइपास और नागपुर रोड के आसपास बड़ी संख्या में होटल, रेस्टारेंट, बारात घर और अवैध कालोनियां विकसित हो चुकी हैं। इनमें से कई निर्माण ऐसे हैं, जिनमें कृषि भूमि का डायवर्सन कराए बिना ही व्यावसायिक गतिविधियां शुरू कर दी गई हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि इन गतिविधियों की जानकारी नगर निगम, जिला प्रशासन और जनपद पंचायत तक को है, लेकिन इसके बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है। इससे शासन को हर साल करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
नगर निगम सीमा से लगे ग्रामीण क्षेत्रों में भी व्यावसायिक गतिविधियों की रफ्तार तेज हो गई है। अंधमूक बाइपास से भेड़ाघाट चौराहे की ओर जाने वाली मुख्य बाइपास के दोनों ओर बड़ी मात्रा में कृषि भूमि दर्ज है। हालांकि इन ज़मीनों पर अब खेती से जुड़ा काम लगभग समाप्त हो गया है। इसके स्थान पर होटल, रेस्टारेंट, बारात घर और अपार्टमेंट तक बनाकर तैयार कर दिए गए हैं।
सबसे गंभीर बात यह है कि इन निर्माणों में से अधिकांश का न तो भूमि उपयोग परिवर्तन (डायवर्सन) कराया गया है और न ही भवन निर्माण का नक्शा स्वीकृत कराया गया है। इसके बावजूद इनका संचालन खुलेआम हो रहा है। खासकर बाइपास के किनारे होटल और रेस्टारेंट तेजी से खुल रहे हैं, जिससे पूरा क्षेत्र धीरे-धीरे व्यावसायिक हब में बदलता जा रहा है।
टीएंडसीपी के नक्शे में यह पूरा इलाका अब भी कृषि भूमि के रूप में दर्ज है। कागजों में खेती वाली ज़मीन, लेकिन मौके पर होटल, रेस्टारेंट और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान दिखाई देते हैं। अब सवाल यह है कि जब जिम्मेदार विभागों को इसकी जानकारी है, तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही।
नए मास्टर प्लान के लागू होने से पहले ही ज़मीन के उपयोग में इस तरह का बदलाव प्रशासनिक निगरानी पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। इधर मास्टर प्लान में ज़मीन कृषि की होने की वजह से इनका व्यावसायिक नक्शा तक पास नहीं हुआ, लेकिन न तो इनकी जांच की और न ही कार्रवाई की गई है।
नगर निगम और जिला प्रशासन की सीमा में आने वाले मास्टर प्लान में जो भूमि कृषि में दर्ज है, उसका उपयोग कृषि में ही होना चाहिए। यदि ऐसा नहीं हो रहा है तो इनके खिलाफ जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
- अभिषेक गहलोत, सीईओ, जिला पंचायत
मास्टर प्लान में बाइपास से लगी भूमि कृषि भूमि है और यहां पर कमर्शियल उपयोग नहीं किया जा सकता। इसके डायवर्सन में कृषि उपयोग ही करना अनिवार्य है।
- राजेश दीवान, टीएनसीपी