
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट ने डीएनए रिपोर्ट में कट पेस्ट के जरिए गलत नाम दर्ज होने के मामले को गंभीरता से लिया है।
न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल व न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने भोपाल स्थित राज्य फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की पिछले पांच वर्षों में तैयार डीएनए और अन्य वैज्ञानिक रिपोर्टों में से 20 प्रतिशत रिपोर्टों की रैंडम जांच कराने के आदेश दिए हैं।
कोर्ट ने मुख्य सचिव को सात दिन के भीतर प्रदेश के बाहर के तीन वैज्ञानिक अधिकारियों की स्वतंत्र समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। समिति छह महीने में जांच पूरी करेगी।
मामले की अगली सुनवाई 14 अगस्त को होगी। सुनवाई के दौरान एफएसएल की प्रभारी निदेशक डा .हर्षा सिंह अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुईं।
उन्होंने स्वीकार किया कि डीएनए रिपोर्ट में गलत नाम दर्ज होना कट पेस्ट की गलती के कारण हुआ हो सकता है। इस पर कोर्ट ने गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि यदि एक मामले में ऐसी त्रुटि सामने आई है तो यह जांचना जरूरी है कि अन्य रिपोर्टों में भी ऐसी गलती तो नहीं हुई।
दरअसल, यह मामला नर्मदापुरम जिले के साकेत इटारसी निवासी पंकज कुमार बिंदोलिया की आपराधिक अपील से जुड़ा है। पंकज ने पाक्सो विशेष न्यायालय द्वारा 16 मार्च, 2026 को सुनाई गई उम्रकैद की सजा को चुनौती दी है।
सुनवाई में सामने आया कि 31 दिसंबर 2024 की एफएसएल रिपोर्ट में गलत व्यक्ति का नाम दर्ज था। कोर्ट ने एफएसएल निदेशक पद पर फोरेंसिक साइंस, बायोलाजी या बायोकैमिस्ट्री जैसे संबंधित विषयों के विशेषज्ञ की नियुक्ति पर भी सरकार को गंभीरता से विचार करने के निर्देश दिए हैं।
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