परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा ने फिर लगाई जमानत की अर्जी, पत्नी की बीमारी का दिया हवाला
मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर कहा गया है कि उन्हें तत्काल फंक्शनल एंडोस्कोपिक साइनस सर्जरी की आवश्यकता है। यह भी कहा गया कि सर्जरी के बाद लंबे पोस्ट आपरेट ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 28 May 2026 08:45:12 PM (IST)Updated Date: Thu, 28 May 2026 08:48:22 PM (IST)
सौरभ शर्मा का फाइल फोटो।HighLights
- आरक्षक सौरभ शर्मा ने एक बार फिर हाई कोर्ट में जमानत की अर्जी दायर की है।
- जमानत अर्जी में दावा किया है कि पत्नी दिव्या तिवारी गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं।
- सर्जरी जरुरी है और बच्चों की देखभाल के लिए परिवार में कोई भी उपलब्ध नहीं है।
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। भ्रष्टाचार और मनी लान्ड्रिंग मामले में जेल में बंद परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा ने एक बार फिर हाई कोर्ट में जमानत की अर्जी दायर की है। शर्मा ने अपनी दूसरी जमानत अर्जी में दावा किया है कि उसकी पत्नी दिव्या तिवारी गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं।
उनकी तत्काल सर्जरी जरुरी है और दो नाबालिग बच्चों की देखभाल के लिए परिवार में कोई अन्य जिम्मेदार व्यक्ति उपलब्ध नहीं है। अर्जी पर अगले सप्ताह सुनवाई संभावित है।
शर्मा ने अर्जी में कहा है कि उसकी पत्नी दिव्या तिवारी डिविएटेड नेजल सेप्टम और क्रोनिक साइनसाइटिस जैसी समस्या से पीड़ित हैं।
मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर कहा गया है कि उन्हें तत्काल फंक्शनल एंडोस्कोपिक साइनस सर्जरी की आवश्यकता है। यह भी कहा गया कि सर्जरी के बाद लंबे पोस्ट आपरेटिव केयर की जरुरत होगी और ऐसे समय में पति की मौजूदगी जरुरी है।
उल्लेखनीय है कि ईडी और लोकायुक्त की जांच में सामने आया था कि सौरभ शर्मा ने कथित तौर पर अपनी करोड़ों की अवैध कमाई को छिपाने के लिए कई लोगों के नाम का इस्तेमाल किया।
जांच एजेंसियों के अनुसार अविरल बिल्डिंग एंड कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियों में उसके दोस्त चेतन सिंह गौर, सहयोगी शरद जायसवाल और रोहित तिवारी को डायरेक्टर बनाया गया।
रोहित तिवारी को उसका साला बताया गया है। इसके अलावा पत्नी दिव्या तिवारी, मां उमा शर्मा और अन्य रिश्तेदारों के नाम पर भूखंड, मकान, पेट्रोल पंप, मछली पालन व्यवसाय, स्कूल प्रोजेक्ट और जमीनें होने के आरोप लगाए गए।
जांच एजेंसियों के मुताबिक दुबई में करोड़ों का विला, भोपाल के आलीशान बंगले, ग्वालियर की जमीनें और इंदौर की आवासीय परियोजनाएं भी इसी नेटवर्क का हिस्सा थीं।