
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। जिला प्रशासन ने बुधवार देर रात 12 बजे जिला अस्पताल विक्टोरिया स्थित जिले के स्वास्थ्य विभाग का औषधि भंडार सील कर दिया। इसके बाद सीएमएचओ आनन-फानन में कलेक्टर के पास गुहार लगाने पहुंचे, तब कहीं जाकर गुरुवार दोपहर 12 बजे जिला प्रशासन के अधिकारी की मौजूदगी में दोबारा खोला गया। बताया जाता है कि यह मामला स्वास्थ्य विभाग में 1.30 करोड़ रुपये के घोटाले से जुड़ा हुआ है, जिसके कारण औषधि भंडार को सील किया गया। देर रात सील करने की कार्रवाई एसडीएम पंकज मिश्रा की अगुवाई में हुई, जबकि दोबारा से गुरुवार दोपहर भंडार को एसडीएम रघुवीर सिंह मरावी खोलने पहुंचे।
भ्रष्टाचार हुआ उजागर तो प्रशासन सक्रिय :
प्राप्त जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत जिले के स्वास्थ्य विभाग में हुए 1 करोड़ 30 लाख रुपये के भ्रष्टाचार का मामला है। शिकायत मिलते ही जिला प्रशासन ने तत्काल जांच टीम गठित की। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह द्वारा भेजी गई जांच टीम ने मौके पर जाकर पड़ताल की और शिकायत के सभी आरोपों को सही पाया। अब आरोपित अधिकारियों के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने और 1.33 करोड़ की वसूली की कार्रवाई शुरू करने की तैयारी है। जिला अस्पताल विक्टोरिया स्थित एनएचएम कार्यालय में जिला लेखा प्रबंधक से जांच टीम ने पंचनामा बनाकर भुगतान की फाइल से जुड़े सभी दस्तावेज ले लिए हैं। सीएमएचओ स्टोर कीपर के स्टॉक रजिस्टर में दर्ज प्रचार-प्रसार सामग्री स्टोर में नहीं पाई गई।
समाजसेवी की शिकायत पर कार्रवाई :
समाजसेवी अरविंद मिश्रा ने पुलिस अधीक्षक आर्थिक अपराध शाखा और कलेक्टर को लिखित शिकायत देकर आरोप लगाए थे कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कार्यालय स्वास्थ्य विभाग में जिला कार्यक्रम प्रबंधक आदित्य तिवारी ने सीएमएचओ डा. संजय मिश्रा के साथ मिलीभगत करते हुए मार्च 2026 के अंतिम सप्ताह में बिना कलेक्टर की अनुमति के औषधि भंडार क्रय नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए करोड़ों रुपये के क्रय आदेश जारी कर दिए। आरोप यह भी है कि न कोई सामग्री जिला स्टोर में रिसीव हुई, न कोई काम पूरा हुआ, फिर भी फर्मों को करोड़ों का भुगतान कर दिया गया।
घोटाले में यह शिकायत आधार बनी
सिंह इंटरप्राइजेज भोपाल को बिना कलेक्टर की अनुमति के 82.51 लाख रुपये का क्रय आदेश जारी कर भुगतान भी कर दिया, जबकि सामग्री आज तक रिसीव नहीं हुई। जिले की शहरी स्वास्थ्य संस्थाओं में बिना रंगाई-पुताई किए, बिना कंप्यूटर सामग्री दिए 51.30 लाख का फर्जी भुगतान। जिले की एक ट्रेडर्स फर्म को 25 लाख से अधिक का भुगतान, वर्क ऑर्डर 02 मार्च को जारी हुआ और मात्र 4 दिन में बिल लगा दिया गया। जबलपुर की फर्मों से कंप्यूटर सामग्री ली ही नहीं गई, सीएमएचओ स्टोर में कोई एंट्री तक नहीं।
अधिकारियों का क्या कहना है
डॉ. संजय मिश्रा, सीएमएचओ :
आरोप निराधार हैं, क्रय प्रक्रिया नियमानुसार जेम्स पोर्टल से होती है। राशि लैप्स न हो, इसलिए मार्च क्लोजिंग के पहले संबंधित फर्म को क्रय आदेश जारी हुए। मैंने व्यक्तिगत जाकर कलेक्टर महोदय से भेंट की और अपना पक्ष रखा। औषधि भंडार बंद रहने से स्वास्थ्य केंद्रों को विपरीत स्थिति का सामना करना पड़ता। वैक्सीन भी यहीं रखी गई है।
रघुवीर सिंह मरावी, एसडीएम :
यह ठीक बात है कि एसडीएम पंकज मिश्रा ने औषधि भंडार सील किया था, लेकिन गुरुवार को उनके कोर्ट में होने के कारण मुझे जाना पड़ा। औषधि भंडार खोलना इसलिए जरूरी हो गया था, क्योंकि दवाइयों का वितरण होना था।
पंकज मिश्रा, एसडीएम :
स्थानीय प्रशासन की ओर से हमें बुधवार रात औषधि भंडार सील करने का आदेश दिया गया था, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। प्रशासन स्तर पर जो आदेश जारी होता है, उसका पालन करना होता है।
यह भी पढ़ें- भोपाल में शेयर मार्केट में 70% मुनाफे का झांसा देकर प्रॉपर्टी डीलर से 18.55 लाख की ठगी, रील के विज्ञापन से बिछाया जाल