घर में जबरन घुसने, गाली देने, धमकाने का था आरोप, हाईकोर्ट ने दिया यह आदेश
धनेश्वर गोले व अन्य ने विशेष कोर्ट में परिवाद दायर कर आरोप लगाया था कि याचिकाकर्ता ने उसके घर में जबरन प्रवेश किया। उसके घर में जातिगत नाम से गाली दी, ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 23 Apr 2026 08:18:31 PM (IST)Updated Date: Thu, 23 Apr 2026 08:20:30 PM (IST)
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का निर्णय।नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा कि यह स्थापित कानून है कि जहां स्वीकृति एक पूर्व शर्त है, वहां स्वीकृति के बिना लिया गया संज्ञान अमान्य है। यदि कार्य आधिकारिक कर्तव्य से संबंधित है, तो न्यायालय ऐसी स्वीकृति के अभाव में लोक सेवक के विरुद्ध कार्यवाही नहीं कर सकता।
इस मत के साथ कोर्ट ने शहडोल के विशेष न्यायाधीश की उस कार्रवाई को निरस्त कर दिया जिसके तहत एक उप निरीक्षक के विरुद्ध एससी-एसटी एक्ट व अन्य धाराओं के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर समन जारी किया गया था।
याचिकाकर्ता शहडोल निवासी राकेश मिश्रा की ओर से अधिवक्ता जय शुक्ला ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि धनेश्वर गोले व अन्य ने विशेष कोर्ट में परिवाद दायर कर आरोप लगाया था कि याचिकाकर्ता ने उसके घर में जबरन प्रवेश किया। उसके घर में जातिगत नाम से गाली दी, उसे धमकाया और संपत्ति को नुकसान पहुंचाया।
कोर्ट को बताया गया कि अवैध कब्जे की एक शिकायत पर थाना प्रभारी के आदेश से उक्त शासकीय कार्रवाई की गई थी। विशेष न्यायालय को उप निरीक्षक के मामले में संज्ञान लेने से पहले शासकीय स्वीकृति लेना जरूरी था।