
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने कटनी के 18 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में केवल समझौते के आधार पर एफआईआर निरस्त करने से इनकार कर दिया।
कोर्ट ने कहा कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और आरोपितों पर फर्जी लेटर पैड तैयार कर रकम लेने जैसे गंभीर आरोपों की जांच शेष है। ऐसे में कोर्ट अपनी अंतर्निहित शक्तियों का प्रयोग कर आपराधिक कार्यवाही समाप्त नहीं कर सकती।
दरअसल, कटनी के व्यापारी तीरथदास मोटवानी ने माधवनगर थाने में दर्ज अपराध की एफआइआर निरस्त करने की मांग की थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि दो आरोपितों ने 18 लाख रुपये लिए थे।
तीरथदास ने नौ लाख रुपये लौटाने के बाद उससे समझौता हो गया, लेकिन सह-आरोपित से कोई समझौता नहीं हुआ।
राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि जांच के दौरान जालसाजी से जुड़े आरोप सामने आने पर बीएनएस की अन्य धाराएं भी जोड़ी गई हैं। याचिकाकर्ता जांच में सहयोग नहीं कर रहा और हस्तलेखन परीक्षण सहित महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए जाने बाकी हैं।
हाई कोर्ट ने कहा कि जांच पूरी होने से पहले एफआइआर निरस्त करना उचित नहीं होगा। याचिका निरस्त करते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि समझौता हर मामले में आपराधिक कार्रवाई समाप्त करने का आधार नहीं बन सकता।
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