
अतुल शुक्ला, जबलपुर। फसल कटाई के बाद खेतों में नरवाई जलाने की समस्या से निपटने के लिए प्रशासन द्वारा अब तक जागरूकता अभियान से लेकर एफआईआर जैसे कदम उठाए गए, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सके। ऐसे में अब प्रशासन ने रणनीति में बदलाव करते हुए किसानों को सीधे समाधान से जोड़ने की दिशा में पहल की है।
कृषि अभियांत्रिकी विभाग द्वारा किसानों को सब्सिडी पर आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि वे खेतों से फसल अवशेष हटाने के लिए किसी बाहरी एजेंसी पर निर्भर न रहें। इसी क्रम में विभाग ने बीते एक वर्ष में करीब 700 से अधिक हैप्पी सीडर और अन्य सीडर मशीनों का वितरण किया है।
जबकि पिछले वर्ष तक केवल लगभग 100 हैप्पी सीडर ही किसानों को दिए गए थे, लेकिन इस वर्ष इसमें कई गुना वृद्धि की गई है। इससे किसानों को बिना पराली जलाए ही खेत तैयार करने में सुविधा मिल रही है और खेती अधिक विज्ञानिक तरीके से की जा रही है।
कृषि अभियांत्रिकी विभाग के सहायक कृषि यंत्री एनएल मेहरा बताते हैं कि किसानों को दिए गए हैप्पी सीडर के लिए विभाग की ओर से सब्सिडी भी दी गई, ताकि उन्हें वित्तीय मदद मिल सके। हालांकि शुरुआत में किसान खरीदने के लिए तैयार नहीं हुए। उन्हें बताया गया कि नरवाई से होने वाले नुकसान का असर उनके काम और खेती पर भी होगा।
इसके लिए किसानों के खेतों में जाकर डेमो भी दिया गया। इसके बाद धीरे-धीरे किसान आगे आए और सीडर खरीदने की मंशा जाहिर की। इस असर यह हुआ कि महज एक साल में ही करीब 700 से ज्यादा सीडर किसानों के लिए सब्सिडी पर खरीदे गए। इसका परिणाम इस साल देखने मिलेगा। खासतौर पर नरवाई न जलाने और सीधे खेतों में जुताई-बुआई करने में मदद मिलेगी।
खेतों में बढ़ते हार्वेस्टर के प्रयोग को कम करने के लिए भी इस बार कई कदम उठाए। इनके लिए किसानों को 250 एस्ट्रा रीपर मशीनें भी दी गई। इन मशीनों की मदद से हार्वेस्टर से गेहूं की कटाई के बाद खेत में बचे अवशेषों को सीधे भूसे में बदला जा रहा है।
इससे न केवल पराली जलाने की समस्या कम हो रही है, बल्कि किसानों को अतिरिक्त आय का भी अवसर मिल रहा है। अभियांत्रिकी विभाग के मुताबिक पराली जलाने से जहां वायु प्रदूषण बढ़ता है, वहीं मिट्टी की उर्वरता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
यह एक आधुनिक कृषि यंत्र है, जिसका उपयोग फसल कटाई के बाद खेत में बची पराली (नरवाई) को बिना जलाए सीधे नई फसल बोने के लिए किया जाता है। यह मशीन खासतौर पर गेहूं की बुवाई के लिए बहुत उपयोगी मानी जाती है।
हैप्पी सीडर एक ट्रैक्टर से चलने वाली मशीन है, जो एक साथ दो काम करती है। इस मशीन में रोटरी ब्लेड लगे होते हैं, जो पराली को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर जमीन पर फैला देते हैं और पीछे लगे सीड ड्रिल से बीज की बुवाई कर दी जाती है।
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