जबलपुर जिले में 15 अप्रैल से होनी थी गेहूं की खरीदी, वेयरहाउस और समिति तय नहीं होने अब तक शुरू नहीं हुई
जबलपुर जिले में 15 अप्रैल से गेहूं खरीदी शुरू होनी थी, लेकिन वेयरहाउस और समिति तय नहीं होने से अब तक उपार्जन शुरू नहीं हुआ। ...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 20 Apr 2026 01:00:48 PM (IST)Updated Date: Mon, 20 Apr 2026 01:03:29 PM (IST)
HighLights
- शुभी एग्रो वेयरहाउस को क्लीन चिट के बाद भी सूची से हटाया, मझगवां समिति से 50 किमी दूर बघेल वेयरहाउस जोड़ा
- शाहपुरा केंद्र 1400 मीट्रिक टन क्षमता वाले काकुल वेयरहाउस में, जबकि जरूरत 3000 मीट्रिक टन की है
- लुहारी का केंद्र 25 किमी दूर शिफ्ट, कुंडम में 5 किमी पर खाली वेयरहाउस छोड़ 10 किमी दूर बनाया केंद्र
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। जबलपुर जिले में 15 अप्रैल से प्रस्तावित गेहूं उपार्जन का कार्य प्रशासनिक लेत-लतीफी और केंद्रों के चयन में मची खींचतान के कारण अब तक शुरू नहीं हो सका है। जिला उपार्जन समिति और खाद्य विभाग पर आरोप लग रहे हैं कि वे नियमों को ताक पर रखकर चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए केंद्रों की सूची में फेरबदल कर रहे हैं। अब तक आधा दर्जन से अधिक सोसायटियों और वेयरहाउसों के नाम जोड़ने और हटाने का खेल खेला जा चुका है।
क्लीन चिट के बाद भी वेयरहाउस सूची से बाहर
निरंद्रपुर-2 समिति से जुड़े शुभी एग्रो लाजिस्टिक्स वेयरहाउस का नाम विभाग ने यह कहकर काट दिया कि पूर्व में जुड़ी महाराजपुर सोसायटी में भुगतान संबंधी गड़बड़ी हुई थी, जिसका मुख्य आरोपित कपिल मिश्रा फरार है। जबकि पूर्व कलेक्टर दीपक सक्सेना की जांच में इस वेयरहाउस को क्लीन चिट मिल चुकी थी। इसी तरह मझगवां समिति से 50 किमी दूर बघेल वेयरहाउस बुढ़ागर को जोड़ा गया, जबकि पास के पांच वेयरहाउस खाली पड़े हैं।
प्राथमिकता और नियमों की अनदेखी
वृताकार शाहपुरा का केंद्र काकुल वेयरहाउस में खोला गया है, जिसकी क्षमता मात्र 1400 मीट्रिक टन है, जबकि केंद्र के लिए 3000 मीट्रिक टन की आवश्यकता होती है। आरोप है कि यह संचालकों के रिश्तेदारों का है। वहीं, महादेव वेयरहाउस में आरछा समिति के केंद्र को लेकर विवाद जारी है। मझौली में मां अन्नपूर्णा वेयरहाउस (4000 मीट्रिक टन क्षमता) की अनदेखी कर दादा भंडारी में केंद्र बनाया गया है।
किसानों की बढ़ी मुश्किलें
लुहारी समिति का केंद्र 25 किमी दूर शिव शक्ति वेयरहाउस में शिफ्ट किया गया है। कुंडम की पड़रिया समिति का केंद्र 10 किमी दूर बनाया गया है, जबकि 5 किमी पर मारुति वेयरहाउस की दो यूनिट खाली हैं। कटंगी के हिनोत गांव में 22 हजार मीट्रिक टन क्षमता वाले पांच वेयरहाउसों को भी मैप नहीं किया गया है। विभाग का तर्क है कि पुरानी शिकायतों के आधार पर बदलाव किए गए हैं, लेकिन इस अव्यवस्था ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।