
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। शहर में बहने वाली नर्मदा नदी केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और रोमांच का भी अद्भुत संगम है। खासतौर पर गर्मी में यहां का जिलहरी घाट तैराकी प्रेमियों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं लगता। यहां दुकानें बहुत कम हैं, तो पानी और हल्का नाश्ता साथ ले जाएं।
गर्मी आते ही जिलहरी घाट में तैराकों की संख्या बढ़ गई है। जिलहरी घाट पर हर दिन सैकड़ों लोग तैरने आते हैं। खास बात यह है कि यहां तैरने वालों में सिर्फ शौकिया लोग ही नहीं, बल्कि ऐसे समर्पित तैराक भी हैं जो हर मौसम गर्मी, सर्दी और बारिश में अपनी दिनचर्या नहीं छोड़ते। इन्हीं उत्साही तैराकों ने मिलकर नित्य तैराकी मंडल का गठन किया है, जो पूरे साल तैराकी से जुड़ी गतिविधियां संचालित करता है।

नित्य तैराकी मंडल में 200 से ज्यादा सदस्य शामिल हैं, इनमें डाक्टर, इंजीनियर, व्यापारी, अधिकारी और युवा सभी वर्गों के लोग शामिल हैं। सुबह छह बजे से ही घाट पर लोगों की आवाजाही शुरू हो जाती है, जो देर रात तक जारी रहती है। घाट पर रोशनी की व्यवस्था होने के कारण लोग रात में भी तैराकी का आनंद लेते हैं। यह जगह केवल व्यायाम का केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक मेलजोल का भी महत्वपूर्ण स्थान बन चुकी है।

तैराकी करने आए दोस्तों के समूह से आनंद, शिवेंद्र ने बताया कि जिलहरी घाट की खासियत यह है कि यहां अनुभवी तैराकों के साथ-साथ नए लोग भी बड़ी संख्या में आते हैं। गर्मियों में खासतौर पर बच्चों और युवाओं की भीड़ बढ़ जाती है, जो तैराकी सीखने के लिए उत्साहित रहते हैं। यहां प्रशिक्षित तैराकों की एक टीम नए लोगों को तैराकी सिखाती है। कई ऐसे युवा भी हैं जिन्होंने यहीं से प्रशिक्षण लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लिया है।

गुप्ता परिवार ने कहा कि बच्चों और युवाओं के लिए यह प्राकृतिक स्विमिंग पूल किसी एडवेंचर पार्क से कम नहीं है। खुले वातावरण, साफ पानी और स्वतंत्रता के साथ तैरने का जो आनंद यहां मिलता है, वह कृत्रिम स्विमिंग पूल में संभव नहीं। जहां स्विमिंग पूल में कई नियम और सीमाएं होती हैं, वहीं यहां खुलकर तैरने और मस्ती करने की पूरी आजादी मिलती है। यही वजह है कि स्थानीय लोग इसे ज्यादा पसंद करते हैं।

नर्मदा किनारे जिलहरी घाट काफी शांत और खूबसूरत है। गौरीघाट या तिलवारा घाट के मुकाबले यहां तैराक या प्रकृति प्रेमियों की ही भीड़ दिखेगी। अगर आपको शांति से बैठकर नदी देखनी है, ठंडी हवा खानी है, तो ये सबसे अच्छी है। सुबह-शाम स्थानीय लोग ही ज्यादा आते हैं। घाट की दोनों ओर विशाल वृक्ष हैं और चट्टानें हैं। यहां नर्मदा की धारा काफी साफ बहती है। बारिश में तो हरियाली और यहां का दृश्य कमाल होता है। यहां पुराना शिव मंदिर है। परिवार के साथ बैठने के लिए बढ़िया जगह है। बच्चे आराम से खेल सकते हैं।
जिलहरी घाट पर तैराकी तो नर्मदा किनारे बसने के साथ ही सदियों से चल रही है, लेकिन आर्गेनाइज्ड तरीके से तैराकी यहां करीब 20 साल पहले शुरू हुई। जिलहरी घाट से तिलवारा घाट तक छह किमी की तिरंगा तैराकी यात्रा 2005 से हर 14 अगस्त को निकाली जा रही है। तब से ये घाट तैराकों के लिए खास बन गया। जिनको तैरना नहीं आता वो भी यहां सीखने आते हैं। अब तो 70 रुपये के फ्लोटर से भी सिखाया जाता है। यहां बड़े तैराकी के आयोजन भी होते हैं जैसे 16 किमी तैराकी अभियान, 10 किमी अखंड भारत तिरंगा यात्रा आदि। छह साल की प्रज्ञा भदौरिया ने भी यहां से 10 किमी तैराकी की थी।
बच्चों का हमेशा हाथ पकड़कर रखें, छह साल की प्रज्ञा भी 10 किमी तैरी थीं, पर ट्रेनिंग के बाद और सेफ्टी के साथ, गहरे पानी में न जाएं, कमर से ऊपर पानी में बिल्कुल नहीं। आपातकाल स्थित में शांत रहें, डर के मारे हाथ-पैर मारने से जल्दी थकोगे। पीठ के बल लेटकर सांस लो, मदद के लिए चिल्लाएं या हाथ हिलाएं। नित्य तैराकी मंडल के लोग हमेशा घाट पर रहते हैं।
नदी में तैरना पूल से बहुत अलग है। बहाव तेज रहता है और गहराई भी है। बिना ट्रेनर के या लाइफ जैकेट के तैरना खतरनाक है। तैरने से पहले अकेले कभी न उतरें। कम से कम दो-तीन लोग साथ हों। नित्य तैराकी मंडल के साथ तैरना सबसे सेफ हैलोकल से पूछ लें, उस दिन बहाव कैसा है, गहराई कहां ज्यादा है। बरगी डैम से पानी छोड़ा गया हो तो बहाव अचानक तेज हो जाता है।
गर्मी में दोपहर को बचें। घाट पर फिसलन हो सकती है, संभलकर चलें। खाने के एक घंटे बाद तैराकी उत्तम होगी। खाली पेट चक्कर आ सकता है। शराब पीकर बिल्कुल नहीं करें, 90% डूबने के केस इसी वजह से होते हैं। तैरना आता हो तो भी नए लोग फ्लोटर जरूर लगाएं। 70 रुपये वाला लोकल फ्लोटर भी ठीक है। बीच नदी में न जाएं। जिलहरी घाट पर नेचुरल पूल वाली जगह सेफ है। पानी के नीचे चट्टानें होती हैं। थकान लगे तो तुरंत बाहर, बहाव के खिलाफ ज्यादा देर लड़ोगे तो हाथ-पैर जवाब दे देंगे।
कहावत है न डूबते को तिनके का सारा ही काफी होता है। किसी की जान बचाना अच्छा होता है, लेकिन अपनी सुरक्षा का भी ध्यान रख्ना होगा। आपके सामने यदि कोई व्यक्ति डूब रहा है तो उसे सीधे न पकड़कर पीछे से पकड़ें या उसके बाल अथवा उसके कपड़े को पकड़ने की कोशिश करें वरना वो आपको भी डुबो देगा। डंडा, रस्सी या फ्लोटर फेंककर बचाएं। जिलहरी घाट में गहराई का अंदाजा नहीं होता है। इसलिए नए लोग बिना गाइड के पानी में न उतरें। इससे आपनकी जान का खतरा बना रहेगा।