
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। जिले में इस बार मानसून उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका। करीब नौ दिन की देरी से पहुंचा मानसून अब विदाई की ओर है, लेकिन जिले में बारिश का आंकड़ा सामान्य स्तर तक नहीं पहुंच पाया। इसे अलनीनो का असर कहे या और कुछ परंतु सच यही है कि इस बार मानसून कमजोर साबित हो रहा है।
एक जून से 29 सितंबर तक महज 845.2 मिमी ही बारिश दर्ज हुई, जबकि सामान्य औसत 1300 मिमी है। यानी सीजन में अब तक 455 मिमी पानी कम बरसा है। यह करीब 35 प्रतिशत की कमी है।
मौसम विभाग के पिछले वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि एक दशक में यह दूसरी बार है, जब जबलपुर औसत बारिश के आंकड़े से इतनी पीछे रहा। वर्ष 2021 में मानसून सीजन में केवल 625 मिमी बारिश हुई थी। इसके उलट 2024 में 1464 मिमी बारिश ने नया उच्च स्तर दर्ज किया था।
मौसम विभाग में दर्ज आंकड़े बताते हैं कि इसके पहले भी मानसून सीजन में जबलपुर में कम बारिश हो चुकी है। करीब 16 साल पहले वर्ष 2000 में भी एेसी ही स्थिति बनी थी। पांच साल पहले 2021 में महज कुल 625.8 मिमी बारिश हुई थी दौरान गर्मियों में जलसंकट गहरा गया था।
गत वर्ष यानि मानसून सीजन 2025 में भी जून से सितंबर माह के बीच औसत से कम 1180.8 मिमी बारिश हुई थी नतीजा ये हुआ कि परियट, खंदारी, बरगी बांध का जलस्तर घट गया और एक चौथाई आबादी को एक-दो बाद बाद पेयजल आपूर्ति करने की स्थिति निर्मित हो गई।
वर्ष कुल वर्षा (मिमी में) इंच में
2015 809.7 31.9
2016 1450.1 57.1
2017 953.5 37.5
2018 1064.9 41.9
2019 1621.1 63.8
2020 1082.4 42.6
2021 625.8 24.6
2022 1345.5 52.9
2023 1376.1 54.2
2024 1464.5 57.6
2025 1180.8 46.5
2026 845.2 33.2
जबलपुर में औसतन 1300 मिमी बारिश दर्ज की जाती है। इस बार मानसूनी गतिविधियों को देखते हुए औसत से कम बारिश की संभावना जताई गई थी। हालांकि इससे ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा। क्योंकि कम बारिश के बाद एक-दो वर्षाें के अंतराल में औसत से अधिक बारिश भी हुई है।
देवेंद्र तिवारी, प्रभारी अधिकारी, क्षेत्रीय मौसम कार्यालय
कम बारिश और तेज धूप, उमस के कारण कीट और बीमारी से फसलें प्रभावित होने की जानकारी सामने आ रही है। पानी का रेगुलर डिस्ट्रीब्यूशन भी नहीं हुआ। इन कारणों से फसलों की पैदावार आंशिक रूप से प्रभावित होने का अनुमान है।
मनीष भान, कृषि विज्ञानी, जवाहर लाल नेहरू कृषि विवि