
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में ग्रिड इंटरैक्टिव रिन्यूएबल एनर्जी प्रोडक्शन अधिनियम-2024 में प्रस्तावित संशोधनों पर विस्तार से चर्चा की गई। आयोग ने सौर ऊर्जा उपभोक्ताओं को राहत देने वाले कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव प्रस्तुत किए, जिन पर विभिन्न पक्षों ने अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज कराईं।
आयोग के प्रस्ताव के अनुसार प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत सोलर संयंत्र स्थापित करने वाले उपभोक्ताओं से ली जाने वाली एक हजार रुपये की प्रोसेसिंग फीस समाप्त की जाएगी। इसके साथ ही मीटर टेस्टिंग के नाम पर उपभोक्ताओं से वसूले जाने वाले तीन से पांच हजार रुपये के शुल्क को भी खत्म करने का प्रस्ताव रखा गया है। प्रस्तावित संशोधनों में यह भी शामिल है कि सोलर पैनल स्थापित करने वाले उपभोक्ताओं को अब पृथक अनुबंध करने की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे प्रक्रिया और अधिक सरल हो सकेगी।
जनसुनवाई के दौरान अधिवक्ता राजेंद्र अग्रवाल ने आयोग के समक्ष आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि सोलर उपभोक्ताओं से प्रति यूनिट दो रुपये का फिक्स चार्ज लिया जा रहा है, जो नियमों के विपरीत और अवैध है। उन्होंने दावा किया कि देश में केवल मध्यप्रदेश की बिजली वितरण कंपनियां ही यह शुल्क वसूल रही हैं। उन्होंने आयोग से इस शुल्क को तत्काल समाप्त करने की मांग की।
अग्रवाल ने सोलर उपभोक्ताओं की सरप्लस बिजली की खरीद दर बढ़ाने की भी मांग उठाई। उन्होंने कहा कि वर्तमान में 30 सितंबर को वार्षिक समायोजन के दौरान बची हुई अतिरिक्त बिजली को डिस्कॉम मात्र 2.15 रुपये प्रति यूनिट की दर से खरीदता है, जबकि उपभोक्ताओं को 8 से 10 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली उपलब्ध कराई जाती है।
ऐसे में सरप्लस बिजली की खरीद दर बढ़ाकर कम से कम 4 रुपये प्रति यूनिट की जानी चाहिए। जनसुनवाई में जबलपुर से शंकर नागदेव सहित तीन आपत्तिकर्ताओं ने भाग लेकर अपने सुझाव और आपत्तियां आयोग के समक्ष प्रस्तुत कीं। आयोग अब प्राप्त सुझावों और आपत्तियों पर विचार कर अंतिम संशोधन अधिसूचित करेगा।