
अतुल शुक्ला, जबलपुर। समर्थन मूल्य पर अच्छे दाम मिलने से किसानों ने जबलपुर ही नहीं बल्कि प्रदेश में मूंग के उत्पाद पर जोर दिया। कम समय में अधिक से अधिक उत्पाद लेने और लागत घटाने के लिए बड़ी मात्रा में मूंग में कीटनाशक की प्रयोग किया। यहां तक की 55 से 60 दिन में पकने वाली मूंग में हर सप्ताह कीटनाशक का छिड़काव किया गया, जिसका असर यह हुआ कि मूंग की गुणवत्ता प्रभावित हुई, वह जहरीली हो गई।
लिहाजा इस बार प्रदेश सरकार समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी से पीछे हट गई है। मूंग की जगह प्रदेश सरकार अब उड़द की खरीदी करेगी। गेंहू कटाई के बाद मूंग की बजाए किसानों को अधिक से अधिक उड़द लगाने के लिए कृषि विभाग, किसानों को प्रोत्साहित कर रहा है। सरकार ने इस बार उड़द में समर्थन मूल्य के साथ 600 रुपये का बोनस देने का भी वादा किया है। जबलपुर में मूंग का रकबा 50 हजार हेक्टेयर है तो वहीं उड़द का रकबा 40 से 45 हजार हेक्टेयर है।
कृषि विवि के मृदा विशेषज्ञ डॉ. शेखर सिंह बघेल बताते हैं कि मूंग मूल रूप से खरीफ यानि बरसात की फसल है, लेकिन अधिक लाभ कमाने की चाहत में किसान इसे गर्मी के मौसम में भी उगा रहे हैं। 55 से 60 दिन में तैयार होने वाली इस फसल में हर सप्ताह कीटनाशकों का छिड़काव किया जा रहा है, जिससे उत्पादन तो बढ़ा, लेकिन गुणवत्ता गिरती चली गई।
कई मामलों में यह फसल उपभोग के लिए भी असुरक्षित मानी जाने लगी है। इसी कारण इस बार मूंग की मांग में कमी आई है और सरकार ने भी इसकी खरीदी से दूरी बनाने का निर्णय लिया है। जबलपुर जिले में हर साल लगभग 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में मूंग की बुआई होती रही है, लेकिन इस बार इसमें कमी आने की संभावना जताई जा रही है।
उड़द की खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने विशेष योजना तैयार की है। उड़द में कीटनाशकों का उपयोग अपेक्षाकृत कम होता है और इसकी फसल अवधि भी संतुलित रहती है, जिससे गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है। किसानों को आकर्षित करने के लिए सरकार ने इस बार समर्थन मूल्य के साथ 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने की घोषणा की है। वर्तमान में जबलपुर जिले में उड़द का रकबा लगभग 40 से 45 हजार हेक्टेयर है।
कृषि विभाग का लक्ष्य इसे बढ़ाकर 60 से 70 हजार हेक्टेयर तक ले जाने का है। इसके लिए किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन और आवश्यक सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है। बदलती परिस्थितियों में किसानों को फसल चक्र अपनाने और कम जोखिम वाली फसलों की ओर रुख करना चाहिए। इससे न केवल मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहेगी, बल्कि किसानों की आय भी स्थिर रह सकेगी।
मूंग की गिरती गुणवत्ता और घटती मांग के बीच उड़द की खेती किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प बनकर उभर रही है। सरकार द्वारा दिए जा रहे अतिरिक्त बोनस और कम लागत के चलते यह फसल आने वाले समय में किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
मूंग का उपार्जन इस बार नहीं किया जाएगा, बल्कि उड़द का उपार्जन होगा। इसकी अधिक से अधिक खरीदी हो, इसलिए इस बार उड़द पर 600 रुपये का बोनस भी दिया जाएगा। किसानों को इस फसल को लगाने के लिए जोर दिया जा रहा है। - एसके निगम, उपसंचालक, कृषि विभाग