वसुंधरा राजे के कथित पत्र को सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के मामले में MP हाईकोर्ट ने जताई नाराज़गी, कहा-कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पुलिस को कैसे सौंपा
कोर्ट ने जहांगीराबाद, भोपाल स्थित पुलिस परिवहन व अनुसंधान संस्थान के 20 अप्रैल, 2026 को दोपहर दो बजे से 21 अप्रैल, 2026 को शाम पांच बजे तक सीसीटीवी फु ...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 22 Apr 2026 09:06:22 PM (IST)Updated Date: Wed, 22 Apr 2026 09:10:53 PM (IST)
वसुंधरा राजे के कथित पत्र का मामला।HighLights
- पुलिस कमिश्नर भोपाल से पूछा-बिना ट्रांजिट रिमांड के राजस्थान पुलिस को कैसे सौंप दिया।
- राजस्थान पुलिस को तीनों कार्यकर्ताओं को अगली तारीख 27 अप्रैल को पेश करने को कहा।
- पुलिस कमिश्नर भोपाल, एसएचओ साइबर क्राइम ब्रांच भोपाल, राजस्थान एसएचओ को नोटिस।
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के एक कथित पत्र को सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के मामले में मध्य प्रदेश कांग्रेस सेल के तीन कार्यकर्ताओं की अवैध रूप से गिरफ्तारी पर कड़ी नाराजगी जताई।
कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर भोपाल से पूछा है कि बिना ट्रांजिट रिमांड या कानूनी प्रक्रिया का पालन किए, कार्यकर्ताओं को राजस्थान पुलिस को कैसे सौंप दिया। कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर भोपाल, एसएचओ साइबर क्राइम ब्रांच भोपाल, राजस्थान के ज्योतिनगर पुलिस थाने के एसएचओ सज्जन सिंह को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
कोर्ट ने राजस्थान पुलिस को तीनों कार्यकर्ताओं को अगली सुनवाई यानी 27 अप्रैल को पेश करने के निर्देश भी दिए। कोर्ट ने जहांगीराबाद, भोपाल स्थित पुलिस परिवहन व अनुसंधान संस्थान के 20 अप्रैल, 2026 को दोपहर दो बजे से 21 अप्रैल, 2026 को शाम पांच बजे तक सीसीटीवी फुटेज भी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
राजधानी भोपाल निवासी खिजर खान सहित अन्य की ओर से अधिवक्ता एचएस छाबड़ा ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि 20 अप्रैल, 2026 की सुबह लगभग तीन बजे साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, भोपाल में पुलिस द्वारा कांग्रेस आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं (निखिल, बिलाल व इनाम) को अवैध रूप से हिरासत में लिया गया था और उन्हें दो दिनों तक किसी भी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश नहीं किया गया है।
वसुंधरा राजे के कथित पत्र को सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के मामले में मप्र कांग्रेस आईटी सेल के कार्यकर्ता हिरासत में, हाई कोर्ट पहुंचा मामला
वहीं शासन की ओर से दलील दी गई कि राजस्थान पुलिस की मौखिक सूचना पर तीनों को पुलिस थाने बुलाकर पूछताछ की गई और फिर उनके परिवार वालों को सौंप दिया गया। अगले दिन दोपहर को फिर सायबर सेल बुलाया और राजस्थान पुलिस को सौंप दिया गया।
बताया गया कि हिरासत या उनकी गिरफ्तारी का कोई रिकार्ड या उन्हें राजस्थान पुलिस को सौंपने से संबंधित कोई दस्तावेज उन्हें नहीं भेजा गया है।
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि पुलिस का पूरा बयान झूठा और मनगढ़ंत है। उन्होंने कहा कि आरोपियों को 20 अप्रैल, 2026 की तड़के हिरासत में लिया गया था और उन्हें किसी भी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश नहीं किया गया। यहां तक कि ट्रांजिट रिमांड के लिए भी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश नहीं किया गया।