• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • कोरोना वायरस
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • दतिया उपचुनाव
  • सावन माह
  • मानसून
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • ए आई बूटकैंप
  • वास्‍तु शास्‍त्र
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • जबलपुर

एमपी हाईकोर्ट का बड़ा फैसला... पति-पत्नी की वास्तविक आय जाने बिना तय नहीं हो सकता भरण-पोषण

हाई कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण आदेश में साफ किया है कि भरण-पोषण के मामलों में पति-पत्नी की वास्तविक आय, संपत्ति, खर्च और वित्तीय दायित्वों का पूरा आकलन ...और पढ़ें

By Surendra DubeyEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Wed, 29 Jul 2026 10:15:08 PM (IST)Updated Date: Wed, 29 Jul 2026 10:15:08 PM (IST)
एमपी हाईकोर्ट का बड़ा फैसला... पति-पत्नी की वास्तविक आय जाने बिना तय नहीं हो सकता भरण-पोषण
एमपी हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

HighLights

  1. पति-पत्नी की आय व खर्च का आकलन किए बिना तय नहीं हो सकता भरण-पोषण
  2. एमपी हाई कोर्ट ने दमोह फैमिली कोर्ट के फैसले को किया निरस्त
  3. हाई कोर्ट ने प्रदेश की सभी अदालतों के लिए जारी किए अहम दिशा-निर्देश

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण आदेश में साफ किया है कि भरण-पोषण के मामलों में पति-पत्नी की वास्तविक आय, संपत्ति, खर्च और वित्तीय दायित्वों का पूरा आकलन किए बिना मेंटेनेंस तय नहीं किया जा सकता।

न्यायमूर्ति द्वारिकाधीश बंसल की एकलपीठ ने दमोह फैमिली कोर्ट द्वारा पारित आदेश को निरस्त कर मामला पुनः सुनवाई के लिए भेज दिया। साथ ही प्रदेश की सभी फैमिली कोर्टों और भरण-पोषण मामलों की सुनवाई करने वाली अदालतों के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए।

दमोह फैमिली कोर्ट के फैसले को पति ने दी थी चुनौती

दरअसल, दमोह निवासी शैलेंद्र राय ने 16 जुलाई, 2025 को सुनाए गए कुटुंब न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें पत्नी प्रगति राय को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत 15 हजार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण देने का निर्देश दिया गया था। पति का कहना था कि उसकी शुद्ध मासिक आय 29,134 रुपये है, जबकि फैमिली कोर्ट ने बिना समुचित वित्तीय मूल्यांकन के लगभग आधी आय के बराबर राशि तय कर दी।


नई सुनवाई तक 15 हजार रुपये प्रतिमाह देना होगा

हाईकोर्ट ने पाया कि सुप्रीम कोर्ट के रजनीश बनाम नेहा-2021 के अनुसार आय व देनदारियों का अनिवार्य शपथपत्र रिकॉर्ड पर उपलब्ध नहीं था, जबकि आदेश-पत्र में उसके दाखिल होने का उल्लेख था। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नई सुनवाई तक पति 15 हजार रुपये प्रतिमाह देता रहेगा, क्योंकि उसने भी आवश्यक वित्तीय शपथपत्र प्रस्तुत नहीं किया था।

यह भी पढ़ें- दतिया उपचुनावः कुल 2.20 लाख से अधिक मतदाता 20 उम्मीदवारों के भाग्य का करेंगे फैसला, इस निर्दलीय प्रत्याशी ने BJP को दिया समर्थन