मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे से निकली राख के आकलन की रिपोर्ट मांगी
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे से निकली 900 मीट्रिक टन राख की टॉक्सिसिटी के आकलन की रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। ...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 24 Apr 2026 07:31:08 AM (IST)Updated Date: Fri, 24 Apr 2026 07:34:27 AM (IST)
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर। फाइल फोटोHighLights
- 2004 में जनहित याचिका के बाद संज्ञान में चल रही सुनवाई; पीथमपुर में हुआ था जहरीले कचरे का विनष्टीकरण
- याचिका में दावा : राख में मरकरी है जिसे नष्ट करने की तकनीक सिर्फ जापान-जर्मनी के पास
- राज्य शासन को भोपाल गैस मेमोरियल बनाए जाने के संबंध में कार्य-योजना प्रस्तुत करने के भी निर्देश
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने रामकी व री-सस्टेनेबिलिटी वेस्ट मैनेजमेंट फैसिलिटी में दबाई गई यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे से निकली 900 मीट्रिक टन राख की टॉक्सिसिटी के संबंध में आकलन रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
इसके साथ ही न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह व न्यायमूर्ति अजय कुमार निरंकारी की युगलपीठ ने भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्टरी परिसर को सुरक्षित कर भोपाल गैस मेमोरियल बनाए जाने के संबंध में शासन को कार्य-योजना प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 22 जून को निर्धारित की गई है।
900 मीट्रिक टन राख व अवशेष एकत्रित
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2004 में आलोक प्रताप सिंह ने यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे के विनष्टीकरण की मांग करते हुए जनहित याचिका दायर की थी। उनकी मृत्यु के बाद हाई कोर्ट मामले की सुनवाई संज्ञान याचिका के रूप में कर रहा है।
पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से पेश रिपोर्ट में बताया गया था कि पूर्व में पारित आदेश के अनुसार यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे का विनष्टीकरण सफलतापूर्वक पीथमपुर स्थित सुविधा केंद्र में कर दिया गया है। जहरीले कचरे से लगभग 900 मीट्रिक टन राख व अवशेष एकत्रित हुआ है।
राख में मरकरी है
इस दौरान हाई कोर्ट में दायर अन्य याचिका में कहा गया था कि कि जहरीले कचरे से निकली राख और अवशेष में यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे की राख में रेडियो-एक्टिव पदार्थ सक्रिय हैं, जो चिंता का विषय है।
राख में मरकरी है, जिसे नष्ट करने की तकनीक सिर्फ जापान व जर्मनी के पास है। आबादी वाले क्षेत्र से 500 मीटर दूर पर उनकी लैंड फिलिंग की जा रही है। हाई कोर्ट ने उक्त याचिका की सुनवाई मुख्य याचिका के साथ किए जाने की व्यवस्था दे दी थी।
लैंड फिलिंग का काम पूरा
बता दें कि हाई कोर्ट ने आठ अक्टूबर 2025 को अपने आदेश में सरकार द्वारा इंसानों की आबादी से सिर्फ 500 मीटर दूर लैंड फिलिंग का स्थान निर्धारित किया जाने पर रोक लगा दी थी। राज्य शासन के आवेदन पर हाई कोर्ट ने उक्त आदेश वापस ले लिया था। पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से बताया गया था कि जहरीले कचरे से निकाली राख की लैंड फिलिंग का कार्य पूर्ण कर लिया गया है।
आवेदन पेश किया गया था
बीजीपीएसएसएस की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने दबाई गई जहरीली राख के पूरे असेसमेंट के लिए हाई कोर्ट के समक्ष आवेदन पेश करने निर्देश जारी किए थे। इसके बाद बीजीपीएसएसएस की ओर से हाई कोर्ट में इंटरविनर बनने आवेदन पेश किया गया था। हाई कोर्ट ने सुनवाई के बाद आवेदन स्वीकार करते हुए उक्त निर्देश जारी किए।
यह भी पढ़ें : मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने न्यायमूर्ति राजेश कुमार गुप्ता के दो निर्णयों को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाने का आदेश वापस लिया