ई-एफआईआर में छेड़छाड़ के आरोप पर एमपी हाई कोर्ट सख्त, भोपाल पुलिस द्वारा आरोपियों के नाम हटाने पर लगाई थी याचिका
ई-एफआईआर में छेड़छाड़ और आरोपियों के नाम हटाने के मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट सख्त हो गया है। ...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 25 Apr 2026 07:45:03 AM (IST)Updated Date: Sat, 25 Apr 2026 07:49:00 AM (IST)
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर। फाइल फोटोHighLights
- ई-एफआईआर में नाम होने के बाद भी चुनिंदा लोगों पर ही दर्ज हुई एफआईआर
- मूल सामग्री के अनुरूप मामला दर्ज नहीं किया, आरोपों को कमजोर किया
- कोर्ट ने बयान वीडियो कैमरे की मौजूदगी में दर्ज करने के निर्देश भी दिए हैं
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की एकलपीठ ने एक मामले में पुलिस कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए राज्य शासन से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता का बयान वीडियो कैमरे की उपस्थिति में दर्ज किया जाए।
मामला डॉ. अंजली मिश्रा द्वारा शंकराचार्य नगर कालोनी बाग सेवनिया भोपाल के पदाधिकारियों के विरुद्ध दायर याचिका से संबंधित है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि उनके द्वारा दर्ज कराई गई ई-एफआईआर में सभी आरोपियों के नाम शामिल थे, लेकिन पुलिस ने केवल चुनिंदा व्यक्तियों के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज की।
आरोपों को कमजोर किया
यह भी आरोप है कि पुलिस ने ई-एफआईआर की मूल सामग्री के अनुरूप मामला दर्ज नहीं किया और आरोपों को कमजोर किया गया। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी कि अब तक धारा 161 सीआरपीसी के तहत याचिकाकर्ता का बयान भी दर्ज नहीं किया गया। इस पर संज्ञान लेते हुए न्यायालय ने राज्य सरकार के अधिवक्ता को विस्तृत स्थिति प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट स्पष्ट किया कि जब भी याचिकाकर्ता का बयान दर्ज किया जाए, वह वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ किया जाना चाहिए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे। कोर्ट ने प्रकरण में प्रतिवादी क्रमांक पांच से 14 तक को नोटिस जारी करने के भी निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।