
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। जिले में धान उपार्जन खत्म होने के बाद शिकायतों का दौर शुरू हो गया है। एक के बाद एक शिकायत सामने आ रही है। इस बीच जिला प्रशासन द्वारा वृत्ताकार सेवा सहकारी समिति मझौली और इससे जुड़े श्रीजी वेयरहाउस में फर्जी धान खरीदी, जांच और कार्रवाई, तीनों पर सवाल खड़े हो गए हैं।
यहां करीब तीन करोड़ 53 लाख रुपये की फर्जी खरीदी हुई, जिसका मुख्य आरोपित केंद्र प्रभारी रत्नेश भट्ट रहा। कार्रवाई करते हुए जिला उपार्जन समिति ने पांच से 13 जनवरी के बीच आने वाले 174 किसानों को फर्जी बताकर इनका भुगतान रोक दिया गया।
सवाल यह उठ रहा है कि जिला प्रशासन ने मुख्य आरोपित के कहने पर फर्जी किसान तय कर दिए और उनका भुगतान रोक दिया।
जबकि उन्हें आरोपित द्वारा बताए गए किसानों के पंजीयन, उनकी लोकेशन, धान व अन्य प्रकरण की जांच करना था। जिन 174 किसानों को फर्जी बताया गया है, उनमें से अधिकांश के पास सोसायटी को अपनी धान बेचने की पर्ची और अन्य रिकॉर्ड मौजूद हैं।
किसानों का आरोप है कि प्रशासन ने मुख्य आरोपित के बयान को सही मानकर फर्जी किसान के नाम तय कर लिए, जबकि पूरे किसानों की जांच होनी थी। उपार्जन शुरू होने से लेकर खरीदी खत्म होने तक करीब 900 से ज्यादा किसानों ने मझौली सोसायटी में धान बेची।
खरीदी शुरू होने के 10 दिन बाद से ही फर्जी किसानों की धान कागजों पर दर्ज होना शुरू हो गया था, लेकिन आरोपित केंद्र प्रभारी ने सिर्फ उन किसानों को फर्जी बताया, जिनकी यदि जांच भी की जाती है तो वे आसानी से बच जाएंगे। जबकि फर्जी किसानों ने 15 दिसंबर से पांच जनवरी के बीच सोसायटी में अपनी धान बेची।
इनमें व्यापारी भी शामिल थे। इतना ही नहीं सही किसानों से पूरी मात्रा में धान ली गई और फिर रात के वक्त वेयरहाउस के अंदर बोरियों से धान निकालकर दूसरी बोरियों में रख दी, जो करीब 33-33 किलो की थीं।
सोसायटी- वृत्ताकार सेवा समिति मझौली, वेयरहाउस श्रीजी
कुल किसान - करीब 900
कागज पर खरीदी- 65 हजार 235 क्विंटल
जांच के बाद- 45 हजार 658 क्विंटल
फर्जी किसान- 174